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बौद्ध धर्म की लहर कभी भी वापस लौटेगी नहीं
दिनांक 24 मई, 1956 के दिन मुंबई में बड़े पैमाने पर बुद्ध जयंति मनाई जाने वाली है। हमारे एकमात्र नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने बहुजन समाज को सीधा मार्ग बताते हुए बौद्ध धर्म स्वीकारने का आदेश दिया है। सत्य, अहिंसा, समता अगर प्राप्त करनी हो तो बौद्ध धर्म स्वीकार करो यह उनका आदेश है। उनकी आज्ञा को सिर आंखों पर मानते हुए भारत की अखिल अस्पृश्य जनता धर्मांतर करने के लिए तैयार हुई है। भारतीय बौद्धजन समिति के पास कई ऐसेखत आए हैं, जिनमें डॉ. बाबासाहेब कब और कहां धर्मांतर करने वाले हैं। सार्वजनिक रूप से या कि सामूदायिक रूप से धर्मांतर का कार्यक्रम होगा? समारोह कहां और कैसे होगा? आदि के बारे में पूछताछ की गई है। इस संदर्भ में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के साथ समिति का पत्राचार हुआ। सभी लोगों की जानकारी के लिए भेजेखत का आशय यहां दिया जा रहा है -
‘‘मैंने पहले एक बार सार्वजनिक निवेदन किया था कि आगामी बैसाख पूर्णिमा के दिन धर्मांतरण करने का इरादा घोषित किया था। उसके अनुसार अस्पृश्य वर्ग के तथा अन्य वर्गों के सैंकड़ों लोग धर्मांतरण करने के लिए तैयार हुए हैं। यह बात सुन कर संतोष हुआ। धर्मांतरण करने के लिए तैयार सभी लोगों का मैं तहेदिल से अभिनंदन करता हूं। आपकी सामूदायिक धर्मांतरण की इच्छा पूरी हो इसलिए मैं कई जगहों के दौरे भी करूंगा आप ही की तरह मेरे पास उत्तर भारतीयों के भी सैंकड़ोंखत आए हुए हैं। उनकी शाखाएं स्थापना कर उनके जरिए प्रचंड संख्या में सभी को धर्मांतरण का अवसर मिले इसलिए यह कार्यक्रम चार-पांच महीने आगे बढ़ाया जाए। इस प्रकार की विनती उनकी ओर से आने के बाद मैंने अपने धर्मांतरण का कार्यक्रम अक्तूबर में करना तय किया है। इतने दिन आप रूके उसी प्रकार और कुछ दिन रुकेंगे ऐसी मैं उम्मीद करता हूं। आने वाले बैसाख माह की पूणि्र्ामा को सभी पिछले साल की तरह ही 2500वी बुद्ध जयंति मनाएं।
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर केखत का मजमून भारतीय बौद्धजन समिति की सभा शाखाएं समझें और विनती है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में 2500वीं जयंती धूमधाम से मनाएं। इस प्रकार मुंबई की भारतीय बौद्ध जनसमिति की ओर से एक सूचना का पत्र का वि सवादकर, बा कृ कबीर, भ. स. गायकवाड़, चिटणीस ने जारी की। प्रबुद्ध भारत के दिनांक 12 मई, 1956 के अंक में वह प्रकाशित की गई है।
प्रबुद्ध भारतः 2 जून, 1956