339 24-5-1956 बौद्ध धर्म की लहर कभी भी लौट नहीं जाएगी - मुंबई - Page 429

410 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कुछ पूछना हो तो वे स्पष्ट शब्दों में मुझसे पूछें। उन्हें जवाब देने की हिम्मत मुझमें है।

भगवान बुद्ध का जो विशाल भिक्षुसंघ था उसमें 75 प्रतिशत लोग ब्राह्मण थे। क्या सावरकर यह जानते हैं? सावरकर यह न भूलें कि सारीपुत्त मोग्गलायन जैसे विद्वान ब्राह्मण थे। सावरकर से मैं एक सवाल यह पूछना चाहता हूं कि पेशवा कौन थे? क्या वे भिक्षु थे? लेकिन उनके हाथ से अंग्रेजों ने कैसे राज्य छीन लिया? सो, सावरकर जैसे नादान और गैरजिम्मेदार लोगों की बातों पर हमें ध्यान नहीं देना चाहिए। कुछ लोग कहते हैं कि सावरकर ने गरल वमन (जहर उगला) किया। लेकिन मेरा कहना है कि सावरकर ने अपने पेट के नरक को वमन किया। कोई भले कितनी ही दुर्भावना से प्रेरित आलोचना करें मेरा मार्ग निश्चित है। मैं बौद्ध धर्म स्वीकार करने जा रहा हूं। आपको ठीक लगे तो आप भी स्वीकारें। अब तक हिंसा के मार्ग से और अमानवीय अत्याचार से बौद्ध धर्म की लहर को उन्होंने लौटाया है। लेकिन अब बौद्ध धर्म की लहर आएगी। वह कभी भी लौटने वाली नहीं है। इस असीम सागर में ज्वार आएगा, भाटा कभी नहीं आएगा। भगवान बुद्ध के संगठन में कुछ त्रुटियां रह गईं। कुछ कमियां रह गई थीं। उन कमियां से बाहर का पानी अंदर आया और बौद्ध धर्म का प्रवाह थोड़ा दूषित हुआ था। लेकिन अब मैं उस धर्म की मरम्मत कर वे छिद्र बंद करने वाला हूं।

बुद्ध चरित्र पर मैंने जो किताब लिखी है उसमें बुद्ध के स्थान का विवेचन किया है। ईसाई धर्म में ईसा अपने को ईश्वर का पुत्र मानता है। बाइबिल में वह यह भी कहता है कि मैं आपको ईश्वर का संदेश बता रहा हूं। मरने के बाद आप जब स्वर्ग में जाएंगे तब मुझे आपकी सिफारिश भगवान के सामने करनी पड़ेगी। तब मैं सोचूंगा कि जब मैं पृथ्वी पर था तब आप क्या मुझे ईश्वर का पुत्र मानते थे? इस्लाम धर्म के मुहम्मद पैगंबर का भी यही हाल है। मुहम्मद भीखुद को ईश्वर का दूत मानता है। लेकिन भगवान बुद्ध के उपदेश में कहीं ऐसा नहीं कहा गया है। भगवान ने कहा है कि केवल मैं कहता हूं इसलिए नहीं लेकिन आपकी विचारशक्ति को अगर ठीक लगे तभी आप इस धर्म को ग्रहण कीजिए। बुद्ध द्वारा ढूंढ कर निकाला गया मार्ग स्व-प्रयत्नों से, स्व-कष्टों से और स्वाध्याय से तैयार किया गया है। किसी दूसरे की पूंजी पर भगवान का धर्म आधारित नहीं है।

मार्क्सवादियों से क्या कहें? वे भगवान बुद्ध का दर्शन जरूर पढ़ें। दुखी, पीडि़त लोगों को दुख से मुक्ति दिलाने का सही मार्ग भगवान बुद्ध ने ढूंढ निकाला। हजारों पीडि़तों को उन्होंने स्वप्रकाश से दुखमुक्त किया। आलार-कालाम के ज्ञान से भगवान को संतोष नहीं मिला। क्योंकि उनकी शिक्षा अधूरी थी। सांख्य दार्शनिक कपिल महर्षि ने दर्शन के सहारे बताया कि धरती जड़ है। हिलती नहीं। फिर उसका विकास कैसे होता है? वह तरह-तरह के रूप कैसे धारण करती है? कपिल ने बताया कि धरती के पेट में जब रज, तम और सत्व गुण संतुलित होते हैं तब वह जड़ लगती है। लेकिन जब इन त्रिविध गुणों का संतुलन