339 24-5-1956 बौद्ध धर्म की लहर कभी भी लौट नहीं जाएगी - मुंबई - Page 430

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बिगड़ जाता है तब धरती अस्थिर होती है। तब वह अलग-अलग रूप धारण करती है। कपिल ने बस इतना ही बताया। लेकिन इससे लौकिक दुखों का निवारण नहीं होगा यह भगवान बुद्ध के ध्यान में आया और इसीलिए उन्होंने चार आर्य सत्यों का आश्रय लिया।

मेरा हाल बाइबिल के मोझेस की तरह होने की संभावना है। पैलेस्टाईन के गुलामों को सुखी करने के लिए मोझेस को बहुत परिश्रम करने पड़े। मोझेस इजिप्त से गुलाम

खरीद लाता था और उन्हें पैलेस्टाइन में आजाद कर सुखी बनाता था। इस कोशिश में उसे बहुत कष्ट सहने पड़े। इजिप्त से बाहर जाते समय मोझेस का बहुत बुरा हाल हुआ। हो सकता है मुझे भी बहुत अधिक यातनाएं सहन करने की नौबत आएगी। इसके बावजूद मैं अपने अस्पृश्य समाज को लेकर बौद्ध धर्म का स्वीकार करूंगा यह तय है।

इस अक्तूबर में, मैं अपना धर्मांतरण मुंबई में करने वाला हूं। उससे पूर्व इस धर्म के बारे में मैं एक किताब प्रकाशित करने वाला हूं। भगवान के बौद्ध धर्म में जो त्रुटियां हैं उन पर इस किताब में, मैं विस्तार से विचार करने वाला हूं। बौद्ध धर्म में उपासक को दीक्षा नहीं दी जाती थी। संघ दीक्षा पर उसका विपरीत असर होता है। उपासक के मन की पूरी तैयारी नहीं हुई रहती। लेकिन मेरे धर्म में उपासकों को भी धम्म दीक्षा दी जाएगी। उससे पूर्व धम्म दीक्षा पर मैं एक किताब लिखने वाला हूं। यह किताब हर व्यक्ति कोखरीदनी पड़ेगी और उस किताब के कुछ सवालों के जवाब भी हर व्यक्ति को देने पड़ेंगे। तभी बौद्ध धर्म में उसे प्रवेश मिलेगा। बौद्ध धर्म में प्रवेश पाने के लिए हरेक को शुभ्र वस्त्र धारण करने होंगे।

धर्म नष्ट क्यों होता है इसका मिलिंद पन्ह इस किताब मेंखुलासा मिलता है। धर्म को तीन प्रमुख कारणों से ग्लानि आती है। पहला कारण है- धर्मतत्व अगर अबाधित न हो या पूरी तरह सोचे बगैर धर्म का गठन किया गया हो तो धर्म को ग्लानि आती है। दूसरी वजह है धर्म में उपस्थित दृढ़ धार्मिता। जिस तरफ वाकपुट लोगों की संख्या अधिक होती है उस धर्म पंथ की हमेशा विजय होती है। तीसरी वजह है कि के सिद्धान्त सामान्यजनों को समझ में आने वाला होना चाहिए।

पूरा अफगानिस्तान किसी समय बौद्ध भिक्षुओं का देश था। भगवान बुद्ध की दुनिया की सबसे अधिक भव्य और ऊंची मूर्ति अफगानिस्तान में है। लेकिन धर्मांध मुसलमानों ने 7 हजार बौद्ध भिक्षुओं की मुंडियां तोड़ कर सड़क पर उनकी ढेरी लगा दी। इसीलिए वहां से बौद्ध भिक्षु डर कर भाग गए।

अब अगर बौद्ध धर्म की लहर आए तो वह कभी नहीं लौटेगी। धर्म की स्थापना के लिए मंदिरों की बहुत जरूरत है। लेकिन मैं स्वकष्ट से एक ऐसा मंदिर बनवाना चाहता हूं जो आपने कभी देखा नहीं होगा। लेकिन उसके लिए लाचार होकर मैं किसी अमीर के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगा। आप अगर रुपया इकठ्ठा कर के देंगे तो मैं मंदिर बनाऊंगा और अच्छा मंदिर बनाऊंगा। अपने अथक प्रयास से बनाऊंगा, दूसरों की सहायता से नहीं।