340 10-6-1956 आजाद विचारों वाले, आजाद मनोवृत्ति के, निर्भय नागरिक बनें - नई दिल्ली - Page 432

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पहले चार तरह के ब्राह्मण थे। समयांतर से उनकी सत्रह अलग उपजातियां बनीं। ब्राह्मण धर्मग्रंथों से पता चलता है कि गोमांस के हिस्से को लेकर, गायों-भैंसों की चमड़ी पर मालिकियत को लेकर हमेशा ब्राह्मणों में युद्ध हुआ करते थे। ब्राह्मणों के देवताओं को प्रसन्न रखने के लिए जो पशुहत्या नहीं करते थे उन्हें ब्राह्मण धर्मानुयायी नहीं माना जाता था। इसी कारण बौद्ध धर्म अस्तित्व में आया। बौद्ध धर्म ने मानव को सोचने की आजादी देकर पूरी तरह सोच कर योग्य मार्ग अपनाने की आजादी दी है। नैतिकता पर आधारित अहिंसा का उपदेश बौद्ध धर्म में दिया गया है। इस बारे में आश्चर्य का कोई कारण नहीं है। लोगों ने अहिंसा का गलत अर्थ लगाया। इंसान को पशुहत्या नहीं करनी चाहिए या हाथ में तलवार लेकर देश की रक्षा के लिए लड़ना नहीं चाहिए यह अहिंसा नहीं है। अहिंसा दो बातों पर आधारित है। आवश्यकता के लिए हत्या और हत्या करने की इच्छा हुई इसलिए हत्या! राष्ट्र पर अगर हमला हुआ, देश अगर संकटों से घिरा तो तलवार हाथों में लेकर, राष्ट्र की रक्षा के लिए हथेली पर सिर लेकर युद्ध क्षेत्र में कूद जाना और दुश्मनों का सफाया करना, उनकी हत्या करना हर नागरिक का कर्तव्य है। इसका मतलब है कि यह हिंसा आवश्यक थी। उसे बौद्ध दर्शन में उच्चतम स्तर की अहिंसा कहा जाता है। दूसरी, मारने की इच्छा मन में पैदा होना। यानी कि, अपने संतोष के लिए पशुबलि देना, पशुहत्या करना - इसे हिंसा कहा गया है।

बौद्ध दर्शन को जैसे का तैसा अपनाकर उसी में अपने जातिवाद आदि के तत्व घुसेड़कर हिंदू दार्शनिक उसे अपना दर्शन कहते हैं। ब्राह्मण धर्म के लेखक कहते हैं कि वेद प्रजापति ने दिए हैं। भगवान बुद्ध ने सवाल पूछा कि प्रजापति किस जगह से पैदा हुआ? हिंदुओं के वेद और गीता का अध्ययन करें तो ध्यान में आता है कि भगवतगीता और कुछ नहीं बल्कि ‘धम्मपद’ ही है। लेकिन ब्राह्मण धम्मपद की नकल करते हुए उसमें जातिव्यवस्था घुसेड़ना नहीं भूले।खुद श्रीकृष्ण ने अपने शिष्यों को उपदेश किया कि ब्राह्मणेतरों को कोई ज्ञान नहीं देना अथवा धर्मोपदेश नहीं देना।

प्रार्थना करने से या किसी के पैर पकड़ने से वे तुम्हें कुछ नहीं देंगे। लड़ना हो तो अपने अंदर पहलवानों-सी ताकत होनी चाहिए। पहलवान बहुतखाता है, उसे हजम भी करता है और उससे शक्ति प्राप्त करता है। उसी प्रकार आपकी मानसिक ताकत बढ़नी चाहिए। सत्य और सही मार्ग का आश्रय तो मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। डरपोक कभी भी लड़ नहीं सकते। अस्पृश्यता की गंदगी हटाने के लिए मैंने कई सालों से अथक मेहनत की है। लेकिन अभी तक मैं अपने उद्देश्य में सफल नहीं हुआ हूं। मेरा मन मजबूत है। इसलिए मैं आखिर तक लडूंगा। जुल्मों के खिलाफ लड़ने के लिए मानसिक बल और नैतिक साहस चाहिए। वह आपको प्राप्त हो इसके लिए मैं आपको नई राह बताता हूं। आप अगर बुद्ध मार्ग का अनुसरण करें तो दुनिया में आपको प्रतिष्ठा प्राप्त होगी, इतना ही नहीं आपको बलप्राप्ति भी होगी और आपके बालबच्चों का भविष्य