340 10-6-1956 आजाद विचारों वाले, आजाद मनोवृत्ति के, निर्भय नागरिक बनें - नई दिल्ली - Page 433

414 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उज्ज्वल बनेगा। समानता और स्वाभिमान से जीने की राह दिखाने के लिए वे आपके प्रति कृतज्ञ रहेंगे।

मैंने सुना है कि लोग अन्याय के खिलाफ लड़ें नहीं, इसलिए उन्हें अपने दल में ले आने के लिए काँग्रेस उन्हें पैसा बांट रही है। सरकार मुझसे भी पैसा लेने के लिए कह रही थी। उद्देश्य उनका यह था कि मेरा मुंह बंद रहे। लेकिन आप जानते हैं कि मैंने कभी पैसा नहीं लिया। अपना पेट पालने के लिए मैं मेहनत करके पैसा कमाऊंगा। अस्पृश्यों के अधिकारों की और हित की रक्षा के लिए आखिर तक लड़ता रहूंगा। इसीलिए मैं आपसे विनती करता हूं कि ध्यान रहे कि भले कुछ भी क्यों न हो जाए कोई आपका स्वाभिमान नखरीद पाए कांग्रेस के पैसा देकर खरीदने के षडयंत्र को कुचल दो। समाज में गर्दन हमेशा ऊंची रहे इसलिए हमेशाखबरदार रहें। सब-कुछ दांव पर लगा कर अपना और समाज का स्वाभिमान कायम रखें। मैं कोई दूत नहीं हूं। या ईश्वर का प्रतिनिधि भी नहीं हूं। मैं भगवान बुद्ध का विनम्र शिष्य हूं। मैं आपको यह मार्ग दिखा रहा हूं। यह मार्ग अगर आपको सही लगता हो तो आप उसका अनुसरण करें। लेकिन इस मार्ग को अपनाने से पहले उसके बारे में सभी पहलुओं पर सोचिए। भगवान बुद्ध ने अपने अनुयायियों से कहा कि किसी भी बात का स्वीकार पूरी तरह से सोच समझ कर ही कीजिए। बिना सोचे-समझे किसी बात को ना स्वीकारें। प्रकृति में मानव स्वतंत्र है, इसीलिए मैं आपसे कहूंगा कि स्वतंत्र विचार-प्रणाली का स्वतंत्र रूप से निडर नागरिक बनें।