416 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के लिए सोचने के अधिकार ब्राह्मणों के पास थे। अकेले क्षत्रिय पर देश की रक्षा का भार था। कैसी आत्मघाती व्यवस्था थी! एक वर्ग के हाथ में तलवार देकर अन्य सभी वर्गों को उस पर निर्भर रहने के लिए कहा। परिणामस्वरूप जब-जब क्षत्रीय परास्त हुए तब-तब दुश्मन ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया।
मेरे इस कथन के लिए इतिहास साक्षी है। 1939 से 1945 के दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान वाले समय में यूरोप में भी कमोबेश 100 लड़ाइयां लड़ी गईं। उनमें से कुछ में यूरोप की हार हुई तो कुछ में जीत। लेकिन हिटलर पूरे यूरोप में कभी भी अपना आधिप्त्य स्थापित नहीं कर पाया। आखिर हिटलर की हार हुई और यूरोप का संरक्षण हुआ। क्योंकि भारत की तरह वहां किसी एक वर्ग को सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। मुसलमानों ने जब-जब भारत पर आक्रमण किया और राजपूतों का कत्लेआम किया तब मानो जैसे पूरा देश ही अकर्मण्य असहाय हुआ।
देश में एक वर्ग ऐसा है जो केवल नफा कमाना और संपत्ति इकठ्ठा करना चाहता है। उन्हें हम बनिया, वाणी अथवा उत्तर की ओर उसे लाला के नाम से पहचानते हैं। देश के कल्याण की या किसी की भलाई की चिंता वे कभी नहीं करते। संपत्ति इकट्ठा करने में उनके जैसा महालोभी कोई और नहीं होगा। देश अगर युद्ध में हारता है तो कोई बात नहीं लेकिन वे युद्ध के सामान में भी नफा कमाएंगे।
बौद्धजन समिति चाहती है कि हर पूर्णिमा के दिन इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। पूर्णिमा के शांत वातावरण में पूर्ण चंद्रमा की शीतलता में मनुष्य को अपने कार्य का सिंहावलोकन शान्ति और गंभीरता के साथ करने का मौका मिलता है, पूर्णिमा की यहीखासियत है।
पुराने जमाने में डायरी, कॅलेंडर्स नहीं हुआ करते थे। तब समय का हिसाब रखने के लिए लोग पूर्णिमा के दिन व्रत रखते थे। अन्य धर्मियों की तरह बौद्ध धर्म यह सीख नहीं देता कि, व्रत रखने से अपने सारे पाप धुल जाएंगे और स्वर्गलाभ होगा। बौद्ध धर्म में जिन्हें जाना नहीं जा सके चीजें अथवा वर (बख्शीश) का कोई स्थान नहीं है। जिन चीजों को आदमी अनुभव कर सकेगा, छू सकेगा, जिनके बारे में बोल सकेगा और जिनका नाश किया जा सकेगा ऐसी ही चीजों के अथवा बातों के बारे में बुद्ध ने उपदेश किया है।
हर किसी को धर्म जांचना-परखना आना चाहिए। बाजार में हम सुनार की दूकान में सोने का अलंकारखरीदने के लिए जाते हैं। तब आप क्या करते हैं? आप यही देखते हैं ना, कि सोना असली या नकली? इसकी पहचान के लिए सोने को कसौटी पर कसा जाता है। उसी प्रकार धर्म को भी कसौटी पर कस कर परखना चाहिए। धर्म के सिद्धान्तों