341 23-6-1-956 किसी जमाने में पूरा अफगानिस्तान देश बौद्ध धर्मीय था - नई दिल्ली - Page 436

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की जांच कर, सिद्धांत और आधारों की हम जांच-पड़ताल कर देखेंगे कि कौन-सा धर्म मनुष्य को सुख और संतोष दे सकता है।

इस नजरिए से देखें तो ब्राह्मण धर्म मानव समाज के अस्तित्व के लिए नाशक ही नहीं भयंकर जहरीला भी है। महाराष्ट्र में देवगिरी का रामराव यादवों का प्रधानमंत्री हेमाडपंत नामक ब्राह्मण था। उसने आचारविधि कर्मकांड के सात सौ तरीके अपनी किताब में लिख कर रखे हैं। एक साल में कुल 365 दिन ही होते हैं। फिर ये 700 विधि किसलिए? हेमाडपंत ब्राह्मण थे इसलिए उसने ये सात सौ ‘आचार’ के तरीके लिख कर ब्राह्मणों के पेट पालने का प्रबंध कर रखा है।

ऐसी ही एक और बात है, सत्यनारायण कथा की। सत्यनारायण की यह कथा और कुछ नहीं बस ब्राह्मणों के भोजन का प्रबंध के लिए किसी ब्राह्मण के उर्वर दिमाग से निकलीखोज है। सत्यनारायण पूजा का समारोह देखें तो आप पाएंगे कि सत्यनारायण को अर्पण करने के लिए जो मेवा-मिठाई और फल होते हैं वे केवल ब्राह्मणों के ही

खाने के काम में आते हैं। किसी सार्वजनिक भोजन समारोह में किसी जाति के साथ बैठ कर भोजन किया जाए अथवा नहीं यह तय करने का अधिकार भी ब्राह्मणों का ही होता है।

अपने से नीच समझ कर ब्राह्मण अगर किसी जाति द्वारा तैयार किया हुआ भोजन

खाने से इनकार कर दे तो उसखाने के बदले में करीब 20 रुपए और कुछ फल वह प्राप्त कर सकता है।खानाखाने के बदले में ब्राह्मण वे चीजें मांग ही लेता है लेकिन शूद्र द्वारा तैयार किया हुआ भोजन करता नहीं। उसके बदले में अपने घर में पका करखाया जा सके ऐसा सारा सामान ब्राह्मण उस शूद्र के घर से ले जाता है। शूद्र भले ही कितनी सफाई से उन्हीं चीजों का प्रयोग करखाना बनाए, लेकिन वह नहीं चलता। क्योंकि वह जो सामान लेकर जाता है उसमें उसके पांच-दस दिनों का इंतजाम हो सकता है।

अगर ‘नारायण’खुद सच हो तो ‘सत्य’ शब्द और क्यों जोड़ा गया है? इनका यह ‘नारायण’ है ही नहीं। ब्राह्मण पंडितों की ही तरह वह लूटने वालों का रक्षा करने वाला है, बस। इनके बताए सारे आचारविधि निरर्थक हैं। यह मौखिक बातें और लफंगेबाजी हजारों वर्षों में पंडितों ने चलाई है।

कुछ लोग गंगास्नान के लिए जाते हैं। गंगा किनारे ब्राह्मण बैठे ही हुए होते हैं! स्नान करने जाने वाले प्रत्येक से वे दक्षिणा (पैसा) लेने के लिए तैयार बैठे होते हैं। गंगा नदी सदियों से बहती है। वह नहाने का पैसा नहीं मांगती। न किसी से लेने के लिए कहती है। ब्राह्मण को एक आना देने के बाद वह कुछ मंत्र बुदबुदाएगा और फिर गंगास्नान के लिए आपको इजाजत मिलेगी इसकी क्या कोई जरूरत है? भोले-भाले लोगों को लगता