420 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ब्राह्मण पुरोहितों के लिए ऐसी कोई कसौटियां नहीं थीं। ब्राह्मण के घर पैदा होने भर से वह पुरोहित बन जाता था। उस पर विद्याध्ययन, अच्छा बर्ताव या अन्य किसी तरह की कोई शर्त नहीं थी। इसलिए ब्राह्मण धर्म पर भले हमला हुआ हो, उनके मंदिर नष् किए गए हों तब भी ब्राह्मण जन्म लेते रहे और वे ब्राह्मण धर्म के कहलाते रहे।
भिक्षुओं का अस्तित्व न रहने के कारण आम लोग ऐसे ब्राह्मणों के चंगुल में फंसे। ब्राह्मणों कोखुला मैदान मिला। वे अपने धर्म का प्रचार और प्रसार करने लगे।
ईश्वर क्या है? गरीब लोगों को लूट कर धर्म के नाम पर जो लूटने वाले थे, उन्होंने ही ईश्वर का डर पैदा किया है।
इस सभा में महिलाएं भी उपस्थित हैं यह अच्छी बात है। लेकिन अपने चेहरे पल्लू से ढंके रखना अच्छी बात नहीं है। निर्भयता से जीवन जीना सीखें। अस्पृश्य महिलाओं में सुधार के बगैर अस्पृश्य समाज में पूरी तरह सुधार संभव नहीं।