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बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा
भारतीय बौद्धजन समिति के प्रवर्तक और अध्यक्ष, भारत की बहुजन जनता के कंठमणी, विदेशों में भी कीर्ति प्राप्त संविधान विशारद, अखिल भारतीय शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के संस्थापक और कर्णधार परमपूज्य डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा आगामी 14 अक्तूबर, 1956 के दिन सुबह 8 बजे नागपूर में बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने की घोषणा की है।
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का
संदेश
26, अलीपुर रोड,
दिल्ली. दिनांक 23 सितंबर, 1956
बौद्ध धर्म स्वीकारने का दिन और समय अब मैंने तय किया है। इस बार, दशहरे के दिन दिनांक 14 अक्तूबर, 1956 के दिन नागपूर में, मैं धर्मांतरण करूंगा।
दशहरे के दिन सुबह 9 से 11 बजे के बीच मेरा धर्म दीक्षा विधि समारोह संपन्न होगा। शाम को सभी लोगों के लिए मेरा व्याख्यान होगा।
बी. आर. आंबोडकर
23 सितंबर, 1956
डॉ. बाबासाहेब ने ‘प्रबुद्ध भारत’ के संपादक के नाम एक विशेष संदेश भेज कर अपने बौद्ध धर्म स्वीकारने के लिए ऊपर्युक्त दिन, तिथी और समय के बारे में सूचना दी है।
विजयादशमी का मुहरत धम्मदीक्षा के लिए तय करने का औचित्य है। महान बौद्ध सम्राट अशोक के विजय दिवस के रूप में ही विजयादशमी मनाई जाती है। इधर के तीन सौ सालों में बरसात के मौसम की समाप्ति के बाद मराठा विजयादशमी के दिन ही सीमोल्लंघन करते थे। अस्पृश्य और दलित समाज के सिर पर पिछले हजार सालों से जो काले बादल छाए थे वे इस ढाई हजारवें बौद्ध वर्ष की विजयादशमी के दिन धम्मचक्र नवप्रवर्तन कर डॉ. बाबासाहेब नष्ट करने वाले हैं। हिंदू धर्म की सीमा में बंद अस्पृश्य समाज इस दिन शतकों से गुलामी में बंद रखने वाले धर्म की चहारदीवारी लांघकर नई आजादी का स्वाद चखने के लिए तैयार होने वाले हैं। यही असली सीमोल्लंघन है। यह संपन्न होने के बाद वापस लौटना नहीं है। इसी भीम निश्चय के साथ हर अस्पृश्य-दलित