342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 441

422 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

का कदम आगे बढ़ने वाला है।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का बौद्ध धम्मदीक्षा समारोह ब्रह्मदेश के महास्थविर पूज्य भिक्षु चंद्रमणी संपन्न करेंगे। उसी वक्त लाखों लोग बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के लिए नागपूर आ रहे हैं।

नागपुर शहर के पूर्व दिशा से रायपूर, दुर्ग, गोंदिया, भंडारा जिलों के, पश्चिम से वर्धा, अमरावती, अकोला, बुलढाणा जिलों से, दक्षिण से मराठवाड़ा, चांदा, बल्लारशहा जिलों के तथा उत्तर से उत्तर प्रदेश, मध्य भारत, भोपाल, होशंगाबाद, बैतूल, शिवणी आदि जगहों से आने वाले बौद्ध धर्म स्वीकारने के इच्छुक लोगों के जत्थे ‘बुद्धं सरणं गच्छामि’ की घोषणा करते हुए नागपूर में आएंगे।

इस अवसर पर वर्धा तथा अन्य जगहों से सवर्ण हिंदुओं का एक बड़ा समूह बौद्ध दीक्षा ग्रहण करने के लिए आने वाला है। दीक्षा लेते समय सफेद वस्त्र पहनने चाहिए और दीक्षा लेने वाले की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए इन दो नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।

उसी दिन शाम को नागपूर में ही डॉ. बाबासाहेब का बौद्ध धर्म स्वीकार करने पर ऐतिहासिक भाषण होना है। दुनिया के धार्मिक इतिहास की इस क्रांतिकारी घटना का प्रत्यक्ष अवलोकन करने का मौका और उसमें हिस्सा लेने का अविस्मरणीय मौका आपको मिला हुआ है। बताया जाता है कि भगवान बुद्ध के बाद पहली बार एक ही समय एक ही दिन एक जगह इतनी बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म स्वीकारे जाने की बात का जिक्र कहीं भी नहीं मिलता है।

नागपूर कीखासियतें

डॉ. बाबासाहेब ने 1930 में ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लासेस लीग की और 1942 में अखिल भारतीय शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की नींव नागपूर में ही रखी। साथ ही उनका बौद्ध धर्म स्वीकारने का कार्यक्रम भी नागपूर में ही होगा।

प्रतिज्ञा-पत्र

डॉ. बाबासाहेब ने 1935 में प्रतिज्ञा की कि, ‘मैं हिंदू धर्म में पैदा हुआ यह मेरे हाथ में नहीं था लेकिन हिंदू बनकर मरूंगा नहीं।’ 21सालों के बाद उस प्रतिज्ञा की पूर्ति हो रही है।

आर. डी. भंडारे’’ ख्1,

  1. प्रबुद्ध भारत, 29 सितंबर, 1956