342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 442

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बॉक्स 2. बौद्ध धर्म अपनाने के संदर्भ में डॉ. बाबासाहेब के विचार

‘‘भगवान बुद्ध इस देश में रहते थे, उनका धर्म आज भी इस देश का धर्म बनेगा इस बारे में मुझे कोई संदेह नहीं।

इंसानियत, समदृष्टि, बंधुभाव, प्रेम से यह सच्चा धर्म बना है। इस धर्म को आप स्वीकारें।

मैंने धर्मांतरण के जिस कार्य की शुरुआत की है उसे ठीक तरह से समझो। उसका महत्व जानो, उसे परखो। उसके बाद ही निर्णय लो। लेकिन एक बार निर्णय लेने के बाद जो पुराना है उसे फेंक दो। पिछले 20 सालों से मैं आपके बारे में सोच रहा हूं। मानव जिन विभिन्न् धर्मों का अध्ययन कर सकता है वह मैंने किया है और आखिर मेरा यह अनुभव रहा है कि दुनिया के लिए योग्य बुद्ध धर्म के अलावा कोई दूसरा धर्म नहीं है। दुनिया में केवल बुद्ध धर्म ही रहेगा।’’ ख्2,

बॉक्स 3. ‘‘जो बौद्ध धर्म को स्वीकार करना चाहते है वे मेरे साथ आएं। जिस व्यक्ति का मन स्वतंत्र नहीं वह व्यक्ति आजाद नहीं। मैंने हिंदू धर्म का त्याग करने का पक्का निर्णय किया है। जो हिंदू धर्म का त्याग करना चाहते हैं वे हमारे साथ आएं। मुझे जो कर्तव्य करना है वह मैं करने जा रहा हूं। मेरे जीवन में कई सारे काम करने बाकी रह गए हैं। जितने काम हो सकेंगे, मैं करूंगा। मेरे पिता को हिंदू धर्म में ही मृत्यु ने ग्रसा। मेरा परिवार भी इसी धर्म में रहते हुए मरा। मेरा हिंदू धर्म में रहना, अब मुझे भी स्वीकार नहीं। व्यावहारिकता रहित मार्ग मुझे बदलना ही होगा।’’ ख्3,

इस बौद्ध धर्म दीक्षा कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा स्थापन की गई भारतीय बौद्धजन समिति की नागपूर शाखा को सौंपी गई थी। उसके अनुसार समिति के सचिव वा. मो. गोडबोले ने धर्मदीक्षा का कार्यक्रम सफल होने की दिशा में दिनांक 21 सितंबर, 1956 के दिन समिति की ओर से परिपत्र जारी किया और वह भारत के अम्बेडकर आंदोलन में सम्मिलित कई लोगों को भेजा था। वह परिपत्र इस प्रकार था-

‘‘ MASS CONVERSION

Revered Dr. BABASAHEB AMBEDKAR, the Founder and President of the Buddhist Society of India & The Bhartiya Bouddha Jana Samiti & shall embrace Buddhism at the ceremony to be held at Nagpur at 8 a.m. On the Vijaya Dashmi Day, Sunday, the 14 [th] October, 1956. Venerable Bhikkhu Chandramani Maha Thera of Burma, now in India] shall perform the ceremony.

  1. प्रबुद्ध भारत, 29 सितंबर, 1956

  2. प्रबुद्ध भारत, 29 सितंबर, 1956