342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 444

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का वहन होने वाला है। पूरे जीवन में इस प्रकार का परम पवित्र दूसरा प्रसंग नहीं, इस बात को जानते हुए नागपूरवासी जनता तन-मन-धन से मदद करेगी ऐसी आशा है। नागपूर के हर मोहल्ले में भारतीय बौद्धजन नागपूर शाखा के चंदा-पुस्तिकाएं भेजी जा रही हैं। आर्थिक मदद देते हुए रसीद अवश्य प्राप्त करें। बाहर गांव के लोग मनीऑर्डर के जरिए समिति के सचिव को चंदा भेजें। इस महान समारोह के स्वागत समारोह के सदस्यत्व की फीस हैं 25 रुपये दिनांक 10 अक्तूबर, 1956 को या उससे पहले फीस अदा कर कोई भी व्यक्ति स्वागत समिति का सदस्य बन सकता है।

धम्म का यह पवित्र काम अखंड होता रहेगा। इसके लिए परमपूज्य बाबासाहेब ने भारतीय बौद्धजन समिति की स्थापना की है। सालाना 1 रुपये का चंदा देकर इसकी सदस्यता लेना आप सबका परमकर्तव्य है। समिति के सीताबर्डी के कार्यालय में सदस्यत्व पाया जा सकता है। मुंबई केंद्रीय समिति के सचिव आयु. भ. स. गायकवाड़ सदस्यता दर्ज करने का काम कर रहे हैं। सो, हर कोई 1 रुपये देकर अपना नाम दर्ज करा लें। जिन्होंने पिछले साल का चंदा दिया था वे भी इस साल का चंदा अदा कर रसीद लें।

इस समारोह के लिए किसी भी प्रकार का टिकट नहीं है। जो दीक्षा ले रहे हैं उनके लिए या दर्शकों के लिए किसी को न टिकटखरीदना होगा न फीस देनी होगी। विनती है कि इस समारोह के लिए सभी उपस्थित रहें।

दीक्षा लेनेवालों के लिए सूचना

जो दीक्षा लेना चाहते हों उनके लिए यह आवश्यक है कि वे शुभ्र वस्त्र परिधान कर आएं। पंडाल में महिलाओं के और पुरुषों के बैठने की अलग व्यवस्था की गई है। दीक्षा लेनेवालों के नाम 11 अक्तूबर 1956 से समिति के कार्यालय में तथा दीक्षा स्थल पर दर्ज कर लिए जाएंगे। नाम दर्ज करने वालों को दो टिकट मुफत दिए जाएंगे। उन्हें सम्भाल कर रखें। पंडाल के दीक्षार्थी विभाग में प्रवेश के लिए हर रोज वे टिकट काम आएंगे। जो लोग साफ सफेद वस्त्र धारण कर आएंगे केवल उन दीक्षार्थियों को ही दीक्षार्थी विभाग में प्रवेश करने दिया जाएगा।

स्वयंसेवकों के लिए सूचना

स्वयंसेवक सफेद हाफ शर्ट और सफेद हाफ पैंट पहन कर आएं। आज से ही वे अपने अधिकारियों से अपने काम के बारे में जानकारी हासिल कर लें और तत्परता से अपना कार्य करें। दीक्षा समारोह के समय उनकी जहां नियुक्ति की जाएगी वहीं से वे दीक्षा लें। दीक्षा लेनेवालों को क्या कहना है यह लाऊड स्पीकर से सुनाई देगा। उसमें बताए अनुसारखुद बोलें।

बाहर गांव से आने वाले स्वयंसेवकों के जत्थे के प्रमुख स्वयंसेवक दल के प्रमुख आयु. क. वि. उमरे, सच्चिदानंद माणके और आर. आर. पाटील से मिल कर अपनी