426 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जिम्मेदारी सम्हालें।
...जनता के लिए सूचना
यह धार्मिक काम परमपवित्र है। समारोह के सभी कार्यक्रमों में शांति और सफाई परिपूर्ण रूप में रहेगी इसी प्रकार का बर्ताव सभी करेंगे ऐसी हरेक से उम्मीद की जाती है। अपने मोहल्ले से निकलते समय मोहल्ले के आने वाले सभी महिला-पुरुष एक जगह इकट्ठा हों। पैदल चलते हुए, बीच-बीच में सौम्य स्वर में ‘बुद्धं सरणं गच्छामि’, ‘धम्मं शरणं गच्छामि’ जपते हुए और बीच-बीच में ‘भगवान बुद्ध की जय’, ‘डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जय,’ ‘बाबासाहेब करें पुकार, बौद्ध धर्म को करो स्वीकार’ कहते हुए चलें। जो लोग साथ में झंडे ले आना चाहते हैं वे बौद्ध धर्म के झंडों के बारे में समिति के कार्यालय से पता करें और वैसे झंडे तैयार करें।
सुबह और शाम के बीच वाले समय में भी शांतिपूर्वक भोजन आदि कार्यक्रम निपटाएं। लाखों लोग उपस्थित होंगे इसलिए ‘क्यू’ लगाने की जरूरत पड़ेगी वहां कतार मेंखड़े रह कर ही आगे बढ़ें। आपकी शांति पर ही समारोह की सफलता निर्भर करती है। पंडाल के बाहर वाले ‘पूछताछ दफतर’ में पूछताछ करें।
कार्यक्रम
स्थानः माता कचेरी (श्रद्धानंद पेठ) के पास वाला विशाल मैदान
कार्यक्रम - दिनांक 12 अक्तूबर, 1956 से 16 अक्तूबर, 1956 तक कार्यक्रम चलेगा। कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी अलग से परिपत्र निकाल कर दी जाएगी।
अध्यक्ष - आयु. रेवाराम कवाडे सचिव - आयु. वा. मो. गोडबोले
उपाध्यक्ष - आयु. सम मेश्राम सहसचिव - आयु. मा. डो. पंचभाई
उपाध्यक्ष - आयु. एच. डी. आवले सहसचिव - आयु. पंजाबराव शंभरकर
उपाध्यक्ष - आयु. मारोतराव साखरकर सहसचिव -आयु. क. वि. उमरे
उपाध्यक्ष - आयु. एच. एल. कोसारे सहसचिव - आयु. बा. ना. वैद्य
खजांची - आयु. द.ल. पाटील सदस्य - आयु. डब्ल्यू. एस. कामले
सदस्य - डॉ. रामटेके आदि 25
नागपूर में होनेवाले डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की बौद्धदीक्षा विधि में
लाखों की संख्या से उपस्थित रहें
14 अक्तूबर के दिन अपने परिसर में समूह के रूप में बुद्ध वंदना मनाएं
दिनांक 14 अक्तूबर, 1956 के दिन - उस दिन दशहरा भी है - बौद्ध धम्म के पुनरुत्थान के एकमात्र भारतीय प्रणेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर नागपूर में बौद्ध धम्म