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की दीक्षा लेने वाले हैं इसके बारे में अब तक सबको पता चल चुका है। डॉ. बाबासाहेब के, भारतीय अस्पृश्य समाज के ही नहीं पूरे भारत देश के जीवन का यह सर्वश्रेष्ठ और अभूतपूर्व समारोह है। इस समारोह में सभी अस्पृश्य और अन्य भारतीय भाई-बहन लाखों की संख्या में उपस्थित रहें यह मेरी उनसे विनती है।
नागपूर शहर में इस समारोह की बहुत बड़े पैमाने पर तैयारी शुरू हो चुकी है। सभी दलित कार्यकर्ता तन-मन-धन के साथ समारोह के प्रबंधन की कोशिशें कर रहे हैं। करीब पांच लाख से अधिक लोगों के इस समारेह में उपस्थित होने का अंदाजा है।
भारत के सभी राज्यों से आने वाले बहुजन बंधु-भगिनी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। गुरुत्वाकर्षण के नियमों के अनुसार पूरे भारत की बहुजन जनता नागपूर में इकठ्ठा होनेवाली है। रेल, मोटर, बैलगाड़ी आदी की कतारें नागपूर के रास्तों में लग गई हैं। नागपूर में इकट्ठा होनेवाली इस प्रचंड जनसमुदाय के कारण आपसे अनुरोध है कि आप कम से कम सामान अपने साथ लाएं। साथ ही, जहां रहना है वहां जरूरत पड़ सकती है इसलिए छोटा बिछौना भी साथ लेते हुए आएं।
जिन बहुजन बांधवों की नागपूर आने की इच्छा होते हुए भी किसी अड़चन के कारण आना संभव नहीं हो पा रहा हो उनका ध्यान हम भारतीय बौद्ध महासभा की ओर से जारी किए गए इस परिपत्र की ओर हम दिलाना चाहते हैं -
जाहीर आदेश
बहनों, और भाइयों,
हमारे पूजनीय नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर नागपूर में दिनांक 14 -10-1956 के दिन दशहरे के सुमहूरत पर बौद्ध धम्म की दीक्षा ले रहे हैं। नागपुरवासियों ने इस कार्य में अपना सहयोग देते हुए तैयारियों में अब तक लाखों रुपयाखर्च किया है। उनके इस महान कार्य के कारण मुंबई वासियों को नई प्रेरणा मिली है और महामुंबई में चार लाख सदस्यत्व दर्ज करने का कार्यक्रम वहां शुरू किया जा चुका है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हर बालिग व्यक्ति को एक रुपए की सदस्यता की फीस अदा करते हुए ‘भारतीय बौद्ध महासभा’ की सदस्यता लेना है। अन्य सभी लोगों के साथ अपनी कमरे में रहनेवाले सभी पुरुष-महिला बालिगों को सदस्य बनाने की जिम्मेदारी आपकी है। आपकी चॉल में स्थानीय शाखाखुल चुकी है। उसके जरिए ही आप इस जिम्मेदारी को पूरा करें। भारतीय बौद्ध महासभा का यह आदेश साकार करने के लिए आप सभी सहयोग करें।
का. वि. सवादकर
भ. स. गायकवाड़