26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के लिए नहीं है, वह केवल हिंदू धर्म की एक विशिष्ट जाति की देखरेख में चलने वाली और खास उन्हीं के लिए चलाई जाने वाली संस्था है। इस विश्वविद्यालय के अध्यापक वर्ग में ब्राह्मणेतर लगभग है ही नहीं, इस बात से क्या वे इनकार कर सकेंगे?
1916 में इस विश्वविद्यालय द्वारा पारित किए गए प्रस्ताव में क्या यह पक्के तौर पर तय नहीं किया गया था कि हिंदू धर्मशाÐ का अध्यापकत्व केवल ब्राह्मणों को ही मिले, किसी अन्य को न मिले, भले उस विषय में उसकी शैक्षिक योग्यता ब्राह्मण अध्यापक से श्रेष्ठ क्यों न हो? बहुत दूर की नहीं, अभी हाल ही में एक कायस्थ लड़की को ब्रह्मज्ञान के पाठ्यक्रम में इस विश्वविद्यालय द्वारा प्रवेश न दिए जाने पर उसे अनशन करना पड़ा था कम से कम इस बात को मेरे मित्र भूले नहीं होंगे। इन सभी उदाहरणों से क्या यही साबित नहीं होता कि यह जातीय अंधानुकरण है, पक्षपात है, धर्मांधता है? पंडितजी के पास इसका कोई जवाब है?
अस्पृश्यों के लिए अलग कॉलेज की स्थापना को लेकर कल हुई चर्चा की रिपोर्ट पढ़ते हुए मेरा ध्यान अपने एक और मित्र श्री अयंगार के वक्तव्य की ओर गया। श्री अयंगार का ध्यान अपने शहर में क्या चल रहा है इस तरफ शायद नहीं गया हुआ दिखाई देता। मैं उनसे कहता हूं कि वे इसी महीने की 12 तारीख का मद्रास से निकलने वाला ‘हिंदू’ अखबार पढ़ें। उसमें उन्हें पता चलेगा कि सालेम में उनके जातभाइयों ने एक सभा का आयोजन किया था, जिसमें यह तय किया गया कि वास ब्राह्मणों के लिए एक बड़ी संस्था की स्थापना की जाए और उस संस्था द्वारा ब्राह्मणों के हितों की रक्षा हो, ब्राह्मणों के लिए कॉलेज खोला जाए, उद्योग चलाए जाएं। और ब्राह्मणों की इस परिषद के अध्यक्ष कौन? सर सी. पी. रामस्वामी अय्यर जैसी विभूति!
इस देश का हर आदमी मुंह से राष्ट्रवाद की जय बोलता रहता है लेकिन उसके काम जातीयता, अंधानुकरण से भरे होते हैं।
जिस समाज को अपने संकट भरे, आत्यंतिक कठिन जीवन के बारे में पहली ही बार अहसास हुआ होता है वह अस्पृश्य समाज इन संकटों से अपनी मुक्तता करवाने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा पाने हेतु शैक्षिक संस्था स्थापन करने की सोचते हैं। तब जो सदस्य अपने बारे में यह कहते नहीं थकते कि, ‘हमने जनता के कल्याण का बीड़ा उठाया है’ वही सदस्य ‘पक्षांधता- जात्यांधता’ मचाई जाने के विरोध में ह८ा बोल कर विरोध दर्ज करते हैं।
सभी सदस्यों के सामने मैं एक महत्वपूर्ण बात साफ करना चाहता हूं कि यह कॉलेज सिर्फ अस्पृश्यों का है यह कहना पूरी तरह गलत होगा। अन्य सभी कॉलेजों की तरह इस कॉलेज में भी हर किसी को शिक्षा पाने की इजाजत है। इतना ही नहीं इस कॉलेज के लिए जिन अध्यापकों की नियुक्ति करनी है उनमें सभी जातियों को शामिल किया