342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 456

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उन्होंने लिखा है -

दिनांक 23 सितंबर, 1956 का ऐतिहासिक निवेदन

बौद्ध दीक्षा विधि समारोह के बारे में जानकारी की शुरुआत दिनांक 23-9-1956 से देनी पड़ेगी।

इस तारीख को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने दिल्ली के 26, अलिपुर रोड के अपने घर से एक अनुरोध प्रेषित किया था। ख्7, वह निवेदन बिल्कुल छोटा था। करीब 4-5 पंक्तियों का मजमून उसमें था। भारत में बौद्ध-धम्म का पुनरुत्थान करने के लिए प्रत्यक्ष बौद्ध-धम्म के स्वीकार का जो इतिहास लिखा जाएगा उसमें इतिहासकारों को इस अनुरोध को विशेष महत्व देना होगा। इतना ही नहीं, वरन् भारतीय भूमि में बौद्ध-धम्म के पुनश्च बीजारोपण के, उसके कारण भारत भर में होने वाले प्रसार के मूलांकुर इस निवेदन में मिलेंगे।

यह निवेदन अखबारों में प्रकाशित हुआ था। दैनिकखबरें देने वाले अखबारों ने इस छोटे से अनुरोधों को अपनी सहूलियत के अनुसार एक कॉलम में जैसे भेजा था वैसे ही छापा। रोजमर्रा की कईखबरों जैसी ही यह एक औरखबर हो जैसे उन्होंने इसखबर को छापा। सामान्यखबर की तरह ही इसखबर को लेकर अखबारों ने पूरे भारत को जानकारी दी कि डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बौद्ध-धम्म का स्वीकार करने जा रहे हैं।

धर्म पुरुषों की प्रथम वाणी

हालांकि, कहना पड़ेगा कि डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के इस छोटे-से अनुरोध में कितना विचित्र सामर्थ्य है, भारतीय समाज रचना के बारे में सोचें तो वह कितना असामान्य है इसका अहसास भारतीय अखबारों को हुआ ही नहीं। इस अनुरोध की खबर रोजमर्रा कीखबरों जैसी नहीं थी। रोजमर्रा कीखबरें और इस अनुरोध में काफी अंतर था। धर्मसंस्थापकों द्वारा अथवा किसी धर्म का पुनरुत्थान करने वाले महापुरुषों द्वारा धर्म की स्थापना के लिए अथवा धर्म पर छायी हीनता को दूर करने के लिए अपनी पहली वाणी का उच्चारण किया उस प्रकार की प्रथम वाणी की खबर देने वाला निवेदन था वह।

बौद्ध दीक्षा का निर्णय लेने से पूर्व

इस अनुरोध पर हस्ताक्षर करने से पहले तथा बौद्ध दीक्षा की विधि, उसे संपन्न करने का स्थान और तारीख तय करने से पूर्व डॉ. अम्बेडकर कितने घंटों तक सोचते रहे थे इसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता। इस निर्णय को लेने से पूर्व उनकी नजर के सामने भारत की दलित जनता पर, अन्य भारतीयों पर तथा दुनिया के अन्य लोगों के ऊपर इस घटना के क्या

  1. यह अनुरोध पृष्ठ क्रम सं. 482 पर है