342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 457

438 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

संभावित परिणाम हो सकते हैं इसके चित्र उनके मानस पटल पर जरूर उभरे होंगे। विभिन्न धर्म के इतिहास के पन्ने उनकी आंखों के सामनेखुलते चले गए होंगे। ईसाई, इस्लाम, बौद्ध आदि प्रमुख धर्मों का दुनिया में कैसे प्रसार हुआ, उनमें से कुछ का अस्त क्यों हुआ आदि बातों पर उन्होंने बार-बार सोचा होगा। भारतीय बहुजनों कोखास कर अस्पृश्य माने गए समाज के सामने बौद्ध धर्म की शरण जाने के अलावा भी कोई और असरदार मुक्ति का मार्ग है क्या इसकी उन्होंने बार-बारखोज की होगी। आखिर उनकी सद्विवेक बुद्धि केंद्रित होकर परम निश्चय के साथ इकलौते सन्मार्ग के तौर पर बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने वाले निवेदन पर उन्होंने हस्ताक्षर किए होंगे। मनोविश्लेषण के तौर पर सोचें तो 23 सितंबर, 1956 का दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के जीवन का अद्वितीय, हर्षपूर्ण और अपने निर्णय की कसौटी परखरे उतरने का अहसास कराने वाला दिन साबित हुआ होगा।

बौद्ध जगत पर असर

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने से संबंधित असर का भारतीय बहुजन वर्ग पर और दुनिया के बौद्ध धर्मावलंबियों पर हुआ यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है। ब्रह्मदेश, श्रीलंका, जापान, नेपाल आदि देशों में इस निवेदन का बहुत ही हर्ष के साथ स्वागत किया गया। बौद्ध दीक्षा विधि से संबंधित अखिल बौद्ध दुनिया से जो संदेश प्राप्त हुए हैं उससे यह बात बिल्कुल स्पष्ट होती है। इन संदेशों के अलावा बौद्ध लोगों ने इस दीक्षा विधि के बारे में जो बंधुभाव व्यक्त किया वह उनकी कृतियों में भी दिखाई दिया। ब्रह्मदेश के पूज्य भिक्षु चंद्रमणि महास्थविर की उम्र 80 वर्ष की है। लेकिन अपने स्वास्थ की परवाह किए बगैर डॉ. बाबासाहेब को दीक्षा देने के लिए

खुद आने की बात उन्होंने मानी और वे आए भी। उनके हाथों ही डॉ. बाबासाहेब और माईसाहब अम्बेडकर का बौद्ध दीक्षा विधि संपन्न हुआ। उनके अलावा अन्य बौद्ध भिख्खु भी समारोह में उपस्थित थे -

  1. थेरो पन्नातिस, सांची विहार (भोपाल)

  2. वेनरेबल भिख्खु एच सिद्धतिस, (सिलोन)

  3. वेनरेबल भिख्खु एम सौधरत्तना, सारनाथ (बनारस)

  4. भिख्खु जी प्रज्ञानंद, बुद्ध विहार, (लखनऊ)

  5. नेर श्रमनेर, धम्मोदय विहार (प. बंगाल)

  6. रेवरंड परमसंधी

पांच करोड़ बौद्ध

अलग-अलग देशों से तथा देश के विभिन्न हिस्सों से इतने भिक्षु आए यह कोई सामान्य घटना नहीं है। बौद्ध दुनिया के लिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की बौद्ध दीक्षा के बारे में