342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 459

440 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जनता की हर झोंपडी तक पहुंचाई गई। नागपूर के सिद्धार्थ, धर्मदीप, धर्मदूत, बोधीसत्व जैसे मशहूर बनते जा रहे साप्ताहिकों ने मध्यप्रदेश विभाग कीखबरों में इसखबर को छापकर जानकारी प्रसारित की। नागपूर शाखा के भारतीय बौद्धजन महासभा की समिति द्वारा छपे हुए पत्रक बांट कर सभी दलित बंधू भगिनियों को बौद्ध-दीक्षा-विधि कार्यक्रम के बारे में लोगों को विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम का ब्यौरा

समिति के पहले प्रकाशित हुए पत्रक में स्वागत समिति के अध्यक्ष आयु. रेवाराम कवाड़े और आयु. वा. मो. गोडबोले द्वारा निम्नांकित कार्यक्रम की घोषणा की गई -

सामुदायिक धर्मांतरण कार्यक्रम की पत्रिका

शनिवार, दिनांक 13-10-1956 के दिन शाम 5-8 परित्राण शाम को 8-10 महाबोधि सोसाइटी के महा सचिव आयु. डी. वलीसिन्हा का भाषण और भगवान बुद्ध का चरित्र और भारत के प्रसिद्ध बौद्ध स्थानों के बारे में मॅजिक लँटर्न शो।

रविवार, दिनांक 14-10-1956 (अशोका विजयादशमी) सुबह 8 से 11 बजे तक परमपूज्य डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और आयुष्यमती माईसाहब अम्बेडकर और अन्य दीक्षार्थियों की पूज्य भिक्षु चंद्रमणि महास्थविर के हाथों बौद्ध धर्म दीक्षा। सुबह 11 से 11.25 बजे तक कोलकाता की महाबोधि सोसाइटी की ओर से परमपूज्य डॉ. बाबासाहेब को भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट की जाएगी। शाम 6 से 8 औरंगाबाद के बोधिमंडल, मिलिंद महाविद्यालय की ओर से ‘युगयात्रा’ इस मराठी नाटक की प्रस्तुति।

सोमवार दिनांक 15.10.1956 सुबह 8 से 11 बजे तक परमपूज्य डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का सार्वजनिक भाषण शाम 8 से 10 बजे तक मॅजिक लँटर्न शो।

इसके अलावा स्वागत समिति द्वारा अंग्रेजी भाषा में एक पत्रिका प्रकाशित की थी। इसके अलावा स्वागत समिति द्वारा प्रकाशित की गई तीसरी पत्रिका 13-10-1956 के ‘प्रबुद्ध भारत’ के अंक में विशेष परिशिष् के रूप में प्रकाशित की गई है। इतने साधनों के साथ बौद्ध दीक्षा विधि समारोह की समयोचित जानकारी भारत के अस्पृश्य वर्ग को और दूसरों को पहुंचाई गई है।

इस जानकारी के प्रकाशित होने के साथ-साथ जिन्हें बौद्ध दीक्षा विधि समारोह के लिए जाना था उन्होंने अपनी तरह से प्रबंध किए। रेलवे में काम करने वाले अस्पृश्य बंधुओं ने तो अपने रेल रियायत वाले पास बनवा लिए। भारतीय बौद्ध महासभा के सचिव आयु. सवादकर, आयु. कबीर और आयु. गायकवाड़ ने पत्रक छपवाकर जिन्हें नागपूर आना था उनके आने-जाने के रियायती टिकट अगर वे नाम दर्ज करें तो दिलाने का प्रबंध किए जाने की बात स्पष्ट की। मुंबई प्रदेश दलित फेडरेशन की ओर से भी इसी प्रकार का प्रबंध किए