342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 461

442 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की गई थीं। इन संस्थाचालकों को जितना धन्यवाद दें कम है। लेकिन इतने लोगों के लिए स्कूल-हाइस्कूल कहां तक काफी होते? सुबह 3 बजे से ही शोभायात्रा और नारों की शुरुआत हुई और नागपूर शहर जाग गया। सुबह से अंबाझरी रोड पर बड़ी भारी भीड़ जुटी थी। नागपूर के लोग ही कह रहे थे कि इस प्रकार का समुदाय और उत्साह आज तक नागपुर के किसी समारोह में देखने में नहीं आया। व्यापारी शहर नागपूर पर इस भीड का असर हुआ। रिक्शे

खान-पान की चीजे आदि के दाम दुगुने हुए। इस समारोह की व्यवस्था और जिम्मेदारी भारतीय बौद्ध महासभा, नागपूर शाखा ने ली थी। इस जिम्मेदारी को मुख्य रूप से आयु. कवाडे, आयु. गोडबोले. आयु. पंचभाई आदि ने निभाया। उन्हें धन्यवाद देना उचित रहेगा।

हृदयस्पर्शी प्रसंग

इस बौद्ध दीक्षा विधि का मन को छू लेने वाला परमोच्च प्रसंग यहां दर्ज करना होगा। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने जब कहा कि मनुष्यमात्र को नीच मानने वाले हिंदू धर्म का मैं त्याग करता हूं ऐसा कहा तब उनका गला भर्रा आया था और उनकी आंखों में आंसू चमक रहे थे। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को उस समय कौन-सा दुख साल रहा था? उनके जैसे घोर निश्चयी महापुरुष की आंखों में आंसू क्यों आए थे? हो सकता है उन्हें लगा हो कि मैंने ज्ञान प्राप्त करने की पराकाष्ठा की, अपने चारित्र्य को श्रेष्ठ रखा, निजी लाभ की परवाह नहीं की, कई ग्रंथ लिख कर भारत के विचारों का भंडार बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, सच्चाई के साथ जीवन बिताया यानि ज्ञान, सच्चापन और शील की कसौटी पर मैं किसी से कम नहीं हूं पिछले तीस सालों से हिंदू धर्म की समाजरचना में ही रहा। लेकिन केवल अपने दलित बंधुओं को इज्जत और स्वाभिमान की राह बताता हूं इसलिए हिंदु धर्म ने कई तरह की कारस्तानियां मेरी राहें बंद करने का काम निरंतर करते रहे। उन्होंने इंसानियत तक को भुला दिया। सो, मैंने या मेरे बुंधुओं ने ऐसा क्या काम किया है कि वे हमें उनके बीच रहने और इंसान की तरह जीने नहीं देते? जो हो, इन घोर स्थितियों से जो राह अपने दलित बांधवों को दिखाई वह पूरी तरह स्वाभिमान भरी और सर्वोत्कृष्ट है इसमें कोई शक नहीं। ख्9,

भारत सरकार फिल्म बनाएगी

अस्पृश्य समाज के इतिहास की यह एक महत्वपूर्ण घटना होने के कारण भारत सरकार की ओर से इस पूरे समारोह की डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जाएगी और साथ ही डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण भी रिकार्ड किया जाएगा।

दुनिया की नजरें टिकी समारोह पर

नागपूर में रहने वाला तथा नागपूर में बाहर से हजारों की संख्या में आया अस्पृश्य समाज इस भव्य धम्मचक्र प्रवर्तन समारोह की भूख-प्यास भूल कर राह देख रहा है

  1. प्रबुद्ध भारत, डॉ. अम्बेडकर बौद्ध दीक्षा विशेषांक, 27 अक्तूबर, 1956