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इसमें कोई दो राय नहीं। पूरे विश्व की नजरें आज इस समारोह पर टिकी हैं और सभी देशों के संवाददाता यहां आए हुए हैं। ख्10,
बौद्ध दीक्षा समारोह
बौद्ध दीक्षा विधि समारोह के लिए करीब 14 एकड़ क्षेत्र का विशाल मैदान तय किया गया था। इस मैदान के चारों ओर टाटों से अस्थायी चारदीवारी बनाई गई थी। कुल तीन पंडाल थे। बीच वाला पंडाल करीब 40 × 20’ का था। उस पर बौद्धकालीन याद दिलाने वाला स्तूप बनाया गया था। इस केंद्रीय पंडाल में ही डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का बौद्ध-दीक्षा-विधि संपन्न हुआ। इसके दोनों तरफ जो पंडाल थे उनमें से एक महिलाओं के लिए और दूसरा प्रमुख नागरिकों के लिए था। केंद्रीय पंडाल के सामने अखबारों के संवाददाताओं के लिए बैठने का विशेष प्रबंध किया गया था। स्वदेशी और विदेशी कुल मिला कर कुल 30 संवाददाता और फोटोग्राफर्स वहां मौजूद थे। पंडाल पर और विस्तीर्ण फैले मैदान में जगह-जगह पर बौद्धधम्म के झंडे लहरा रहे थे जो नीले, लाल, हरे पट्टे वाले थे।
5 लाख से अधिक की उपस्थिति
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर महास्थविर भिक्षु चंद्रमणि के साथ सुबह साढ़े नौ बजे समारोह स्थान पर आए। तब तक पूरा पंडाल लोगों से भर गया था। करीब 5 से 6 लाख का जन समुदाय उपस्थित था और उनमें से 3 से 4 लाख लोग बाहर से ही थे।
वातावरण ‘भगवान बुद्ध की जय’ ‘बाबासाहेब करें पुकार, बौद्ध धर्म का करो स्वीकार’ जैसे नारों से गूंज रहा था।
मंच पर सामने की तरफ एक मेज पर भगवान बुद्ध की कांसे की मूर्ति रखी गई थी जिसके दोनों ओर एक एक सिंह था। सामने धूप जल रही थी।
बाबासाहेब के पिताजी की निर्वाण तिथि का स्मरण
समारोह की शुरुआत कु. इंदुताई वराले द्वारा गाए स्वागत पद से हुई। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के पिता दिवंगत रामजी मालोजी अम्बेडकर की निर्वाण को तारीख भी उसी दिन यानी 14 अक्तूबर, 1956 को ख्11, इसलिए अभिवादन करने के लिए वहां उपस्थित पांच लाख से अधिक लोगों ने कुछ मिनटों के लिए मौन धारण किया।
दैनिक तरुण भारत, नागपूरः 15 अक्तूबर, 1956
चां. भखैरमोडे लिखित डॉ. भी. रा. अम्बेडकर चरित्रखंड 1 पृ. 63 तथा धनंजय कीर लिखित Dr.
Ambedkar ः Life and Mission ग्रंथ में पृ. क्र. 24 पर बताया गया है कि डॉ. बाबासाहेब
अम्बेडकर के पिता रामजी सुबेदार दिनांक 2 फरवरी, 1913 को गुजर गए थे। इसके अनुसार उनकी
बरसी 14 अक्तूबर, के दिन नहीं पड़ती है। दीक्षा विधि से पूर्व उनकी स्मृति को अभिवादन उनकी बरसी
होने के कारण नहीं वरन् उनके कार्य के कारण डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के जीवन की महत्वपूर्ण,
क्रांतिकारी घटना के अवसर पर उनकी स्मृति को अभिवादन किया गया होगा - संपादक