444 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बाद में डॉ. बाबासाहेब और माईसाहब ने पूज्य चंद्रमणि के सामनेखड़े होकर भगवान बुद्ध की मूर्ति के सामने हाथ जोड़ कर -
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासबुद्धस अर्थ - जीवन्मुक्त, संपूर्ण और जागृत भगवान बुद्ध को मेरा नमन।
पाली भाषा में यह उन्होंने लगातार तीन बार कहा। उसके बाद पूज्यभन्ते चंद्रमणि ने अम्बेडकर दंपति से आगे उद्धर्ष्त सरणंत्तयं ( तीन अनुसरणे ), पंचसीलानी (पांच शील) कहने के लिए कहा और उनसे कहलवा लिया -
सरणंत्तयं (तीन अनुसरणे)
बुद्धं सरणं गच्छामि।।
धम्मं सरणं गच्छामि।।
संघं सरणं गच्छामि।।
दुतियम्पि, बुद्धं सरणं गच्छामि।।
दुतियम्पि, धम्मं सरणं गच्छामि।।
दुतियम्पि, संघं सरणं गच्छामि।।
ततियम्पि, बुद्धं सरणं गच्छामि।।
ततियम्पि, धम्मं सरणं गच्छामि।।
ततियम्पि, संघं सरणं गच्छामि।।
( अर्थ -मैं बुद्ध का अनुसरण करता हूं
मैं उसके धम्म का अनुसरण करता हूं
मैं उसके संघ का अनुसरण करता हूं)
दुबारा, मैं बुद्ध का अनुसरण करता हूं
दुबारा, मैं उसके धम्म का अनुसरण करता हूं
दुबारा, मैं उसके संघ का अनुसरण करता हूं
तिबारा, मैं बुद्ध का अनुसरण करता हूं
तिबारा, मैं उसके धम्म का अनुसरण करता हूं
तिबारा, मैं उसके संघ का अनुसरण करता हूं।