342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 466

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  1. मैं शराब नहीं पिऊंगा।

  2. प्रज्ञा, शील और करुणा इन तीन तत्वों के सहारे मैं अपना जीवन यापन करूंगा।

  3. मनुष्यमात्र के उत्कर्ष के लिए हानिकारक और मनुष्यमात्र को असमान और किसी को नीच मानने वाले अपने पूर्व हिंदू धर्म का मैं त्याग करता हूं और बुद्ध धम्म को स्वीकार करता हूं।

  4. बौद्ध धम्म सद्धम्म है इसका मुझे पूरा-पूरा यकीन है।

  5. मैं मानता हूं कि मेरा नए सिरे से जन्म हो रहा है।

  6. आज के बाद मैं बुद्ध की दी हुई शिक्षा के अनुसार ही चलूंगा।

यह समारोह करीब 50 मिनटों तक चलता रहा। डॉ. बाबासाहेब और आयुष्यमती माईसाहब का दीक्षा विधि 9.40 से 9.45 बजे के बीच पांच मिनटों में संपन्न हुआ। बौद्ध धम्म की दीक्षा लेने के बाद बाबासाहाब को पुष्पमालाएं पहना कर उनका स्वागत किया गया। 10 बजे सामुदायिक दीक्षाविधि संपन्न हुई। सरणों की तीन बार घोषणा के बाद डॉ. बाबासाहेब की जय का निनाद वातावरण में गूंजा।

इस समय अखिल महाबोधि समिति के उपसचिव आयु. वली सिन्हा ने डॉ. बाबासाहेब को एक चिकनी मिट्टी की बुद्ध प्रतिमा भेंटस्वरूप दी।

बौद्ध धम्म की दीक्षा जिन्होंने ली उनमें इन प्रमुख व्यक्तियों का समावेश था - बॅ. राजाभाऊखोब्रागडे (श.े का. फ.े के. उपसचिव), महाराष्ट्र शाखा के अध्यक्ष आयु. भा. कृ. गायकवाड़, आयु. आर. डी. भंडारे (अध्यक्ष, मुंबई प्रदेश फेडरेशन), शांताबाई दाणी, आयु. सी. एन. मोहिते, आयु. गो. ति. परमार (गुजरात शाखा के अध्यक्ष), आयु. वा. कां. परमार, आयु. डी. जी. जाधव, आयुष्यमति सरोजिनी जाधव, पुणे के आयु. वि. रा. रणपिसे, आयु. ससालेकर, आयु. हरिदास आवले, आयु. सदानंद फुलझेले, आयु. अहोटे, आयु. वी. एस. पगारे, आयु. उपसाम, आयु. बी. एस. मोरे, आयु. बी. एच. वराले, आयु. धोंडिराम पगारे, आयु. यशवंतराव अम्बेडकर (बाबासाहेब के पुत्र), आयु. मुकुंदराव आंबेडकर, आयु. बी. सी. कांबले आदि।

इसी समय न्या. भवानीशंकर नियोगी, आयु. कुलकर्णी (बुद्ध समिति के सचिव), औरंगाबाद के मिलिंद कॉलेज के प्राचार्य आयु. एम. वी. चिटणीस, आयु. बी. एस. कबीर आदि सवर्ण हिंदुओं ने भी बौद्ध धम्म की दीक्षा ली।

सुबह 11 बजे तक यह समारोह चल रहा था। बाद में रात औरंगाबाद के मिलिंद महाविद्यालय के छात्रों ने ‘युगयात्रा’ नाटक प्रस्तुत किया। आयुष्यमती माईसाहब अम्बेडकर इस कार्यक्रम में उपस्थित थीं।