448 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बड़ों के शुभ संदेश
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की बौद्ध दीक्षा विधि के उपलक्ष्य में ब्रह्मदेश के प्रधानमंत्री यू. बा. स्वे. और पूर्व प्रधानमंत्री यू. नू, पूर्व पाकिस्तान बुद्धिस्ट कॉन्फरंस के पूज्य प्रियदर्शी सिहाबिर, आंध्रा बुद्धिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष पी. बी. सेनागुप्ता, कोलकाता बौद्ध धर्मकुंवर सभा के डॉ. अरविंद बारुआ एम. ए. पी.एच. डी, बार. एट. लॉ, कोलंबो के. एच. डब्ल्यू. अमरासुरिया, रंगून के महाथेरो पन्नलोक, कोझिकोडे के महाबोधि बुद्धिस्ट मिशन के भिक्षु धर्मानंद आदि कई थेरो, बौद्ध भिक्षु और महापुरुषों के संदेश आए।
दीक्षा विधि पूरी होने के बाद डॉ. बाबासाहेब का अभिनंदन और उनके लिए अभीष्टचिंतन करने वाले संदेश पढ़ कर सुनाए गए। उनमें से चुनिंदा संदेश संक्षेप में आगे दिए जा रहे हैं-
ब्रह्मदेश के प्रधानमंत्री यू. बा. स्वे. और पूर्व प्रधानमंत्री य.ू नू. अपने संदेश में कहते हैं-
‘‘प्रधानमंत्री यू. बा. स्वे और पूर्व प्रधानमंत्री यू. नू. दोनों को दिनांक 14 अक्तूबर, 1956 को नागपूर में होने वाले डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की दीक्षा विधि समारोह का आमंत्रण प्राप्त होने कीखुशी है। दोनों पर काम की बहुत जिम्मेदारियां होने के कारण दिनांक 14 अक्तूबर को वे उपस्थित नहीं रह पाएंगे इसका उन्हेंखेद है। लेकिन, यू. बा. स्वे. और यू. नू. दोनों की ओर से इस कार्यक्रम के लिए तथा डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के लिए अतिशुभ की कामना करते हैं और डॉ. अम्बेडकर को धन्यवाद देते हैं। डॉ. अम्बेडकर का बौद्ध धम्म दीक्षा विधि समारोह अपूर्व है। भारत और ब्रह्मदेश में भी उनके बारे में लोगों के मन में आदर की भावना है।’’
कोलंबो के एच. डब्ल्यू. अमारसूरिया अपने संदेश में कहते हैं-
‘‘दिनांक 14 अक्तूबर, 1956 के दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और उनके अनुयायी, उनके प्रशंसक बौद्ध धम्म दीक्षा लेने वाले हैं यह पढ़ कर महती आनंद हुआ। 14 अक्तूबर, का दिन दुनिया के सभी बौद्ध लोगों को स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा इसमें कोई शक नहीं। पहले से तय कार्यक्रमों के कारण 14 तारीख को मैं नागपूर आ नहीं पाऊंगा इसका मुझेखेद है। डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूं। आम तौर पर अखिल बौद्ध जनों के बीच बौद्ध शासन को ऊंचा दर्जा प्राप्त करवा लेने के लिए औरखास कर वैज्ञानिक बुनियाद पर भारत में बौद्ध शासन फिर से स्थापित करने के लिए डॉ. अम्बेडकर दीर्घायु हों।’’
डॉ. अरविंद बारुआ (एम. ए. पीएच डी. बार एट-लॉ) कोलकाता से भेजे संदेश में कहते हैं-
‘‘डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर तथा उनके अनुयायी बौद्ध दीक्षा लेकर बौद्ध जगत में