342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 468

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समाविष्ट हो रहे हैं। मैं उनका मन से स्वागत करता हूं। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने बौद्ध दीक्षा लेने के बारे में लिया निर्णय युगप्रवर्तक है। उनके बारे में मेरे मन में परम आदर है। बौद्ध धम्म को फिर उच्च पद तक ले जाने में तथा आज की धर्मग्लानी को दूर करने के लिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर जैसे दैदीप्यमान व्यक्तित्व की दुनिया के बौद्ध जनों के लिए आज बेहद जरूरत है। उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से तथा उनके ज्ञान से उन्हें दुनिया के बुद्ध शासन का आदर प्राप्त करेंगे इसका मुझे यकीन है। मेरी बिनती है कि वे इस महान कार्य के लिए आगे आएं।

14 अक्तूबर, 1956 के दिन नागपूर में हो रहे इस शुभ प्रसंग पर मैं अंतःकरण से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की महान सीख से निष्ठा और उनके अनुयायियों के साथ विशुद्ध बंधुभाव व्यक्त करता हूं।’’

रंगून के महाथोरो, यू पन्नलोक अपने संदेश में कहते हैं-

‘‘14 अक्तूबर, 1956 के दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और उनके अनुयायी बौद्ध दीक्षा लेकर भगवान बुद्ध की सीख के तीन आश्रयों की छत्रछाया में आएंगे यह सुन कर हर्ष हुआ। मैं उन सभी के लिए शुद्ध और मुक्त जीवन की कामना करता हूं। मैं प्रार्थना करता हूं कि, भगवान बुद्ध के अष्टांमार्ग का सब अनुसरण करें और मानवमात्र का दुःख समाप्त कर सच्ची शांति का प्रतीक निर्वाण उन्हें प्राप्त हो।’’ ख्14,

सोमवार, दिनांक 15 अक्तूबर, 1956 के दिन सुबह 10-12 बजे के बीच डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का बौद्ध धर्म को स्वीकार करने के बारे में स्फूर्तिदायक और अत्यंत भावनाकुल होकर कहे गए, जानकारी से भरा भाषण हुआ। लाखों लोग उनका भाषण धूप मेंखड़े रह कर या जहां भी जगह मिले वहां बैठ कर एकाग्र मन से सुन रहे थे। ख्15,

उन्होंने में कहा-

‘‘सभी बौद्धजनों और उपस्थित मेहमानों,

कल और आज सुबह बौद्ध दीक्षा लेने और देने का जो समारोह यहां हुआ उसके बारे में लोगों को थोड़ा मुश्किल लग रहा होगा। उनके हिसाब से कल का कार्यक्रम आज और आज का कार्यक्रम कल होना चाहिए था। यह जानना जरूरी है कि हमने इस कार्य की जिम्मेदारी क्यों ली? उसकी क्या जरूरत थी? इससे हासिल क्या होगा? ये बातें जानने के बाद ही हमारे काम की नींव मजबूत होगी। यह सब जानने का काम असल में कल ही होना चाहिए था लेकिन कुछ बातें इतनी अनिश्चित होती हैं कि वे अपने समय से होती रहती हैं। यह विधि भी इसी प्रकार संपन्न हुई यह सच है हालांकि, कार्यक्रमों

  1. प्रबुद्ध भारत - डॉ. आंबेडकर बौद्ध दीक्षा विशेषांक, 27 अक्तूबर, 1956 पृष्ठ क्र. 31-29
  2. डॉ. भी. रा. अम्बेडकर चरित्र, लेखक चां. भ.खैरमोडे,खंड 12, पृ. 57