238 26-3-1946 बात राष्ट्रवाद की, कृति जातिवाद की - मुंबई - Page 47

28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सीटें जीती हैं क्या उन तरीकों की काँग्रेस ने कभी पड़ताल की है? क्या तरीके अपनाए गए थे यह मैं बताता हूं और सबूतों के साथ बताता हूं।

कई जगहों पर, वास कर सातारा जिले में मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने ही नहीं दिया गया। सभी सदस्यों को इस बात का पता तो होगा ही कि सातारा जिला वही जगह है जहां पत्री सरकार थी। 361 गांवों के अस्पृश्य मतदाताओं को गांव वाले गांव की कचहरी में लेकर गए। डरा धमकाकर उनसे पूछा गया कि आप काँग्रेस को वोट देंगे या नहीं? अस्पृश्य मतदाताओं ने काँग्रेस को वोट देने से साफ इनकार किया उन्हें कचहरी में ही बंद करके रखा गया। उन पर पहरा बिठाया गया ताकि वे वहां से हिलें नहीं। इस तरह के कई उदाहरण मैं आपको बता सकता हूं। यह तो कुछ भी नहीं, काँग्रेस के विरोध में खड़े रहे अस्पृश्य उम्मीदवारों के साथ मारपीट भी की गई। अभी हाल में आगरा में चुनाव हुए, वहां की बात ही लीजिए। चुनाव के दिन अस्पृश्यों के पचास मकान जलाए गए। अस्पृश्य मतदाता, मतदान केंद्र पर वोट देने गए तो पीछे 20 लोगों के घरों को लूटा गया। नागपूर में सात लोगों के कत्ल हुए और यह सब काँग्रेस के सवर्ण हिंदुओं ने किया। चुनाव जीतने के लिए ऐसे तरीके अपनाए गए। ये सीटें काँग्रेस ने जीतीं या जिस राजनीतिक पार्टी का मैं प्रतिनिधि हूं उस शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन ने जीतीं यह केवल चुनाव परिणामों के आधार से तय करना केवल मूर्खता होगी क्योंकि, समाज में अस्पृश्यों की संख्या 5 प्रतिशत है और हिंदुओं की संख्या 95 प्रतिशत है। ऐसे हालात में कौन किसका प्रतिनिधि है यह कैसे तय किया जा सकता है? इसीलिए, चुनाव परिणामों की कसौटी प्राथमिक चुनावों के परिणामों से ही तय की जानी चाहिए। क्योंकि, अस्पृश्यों के प्राथमिक चुनाव अलग चुनाव क्षेत्र के आधार पर हुए हैं। इन प्राथमिक चुनावों के परिणाम क्या निकले? यहां बैठे लोगों को पता चले इसलिए मैं यहां कुछ जगहों के परिणाम बताता हूं। आप यह बहुत गौर से सुनिए -

पंजाब में तीन जगहों पर प्राथमिक चुनाव हुए। मुंबई में तीन सीटों के लिए, मध्य प्रांत में चार जगहों पर, मद्रास में दस जगहों पर और संयुक्त प्रांत में दो जगहों पर प्राथमिक चुनाव हुए। सदस्य एक बात ध्यान में रखें कि प्राथमिक चुनाव अपरिहार्य नहीं होते। अस्पृश्यों के पांच उम्मीदवार जब तक चुनाव में नहीं उतरते तब तक प्राथमिक चुनाव नहीं हो सकते। चुनावों में अंट-शंट वर्चा होता और उतने रुपए न होने के कारण अस्पृश्य प्राथमिक चुनाव ही नहीं चाहते। कुल 22 जगहों के लिए प्राथमिक चुनाव हुए। हर सीट के लिए काँग्रेस ने अपना प्रत्याशी खड़ा किया था। इन 22 सीटों में से 19 सीटों पर शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के उम्मीदवारों को सर्वाधिक वोट मिले। मुंबई में दो जगहों पर तो अस्पृश्य उम्मीदवार की तुलना में काँग्रेस के उम्मीदवार को नगण्य वोट मिले। भायखला विभाग में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के उम्मीदवार को 11334 वोट मिले जबकि काँग्रेस के उम्मीदवार को केवल 2096 वोट मिले और मुंबई जी. और