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उपनगर विभाग में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के उम्मीदवार को 12899 वोट मिले जबकि काँग्रेस के उम्मीदवार को केवल 2088 वोट मिले। मध्य प्रांत के केवल दो जगहों के ही आंकड़े मैं देता हूं। नागपूर चुनाव क्षेत्र में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के उम्मीदवार को 1933 वोट मिले जबकि काँग्रेस के उम्मीदवार को केवल 270 वोट मिले। भंडारा विभाग में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन को 3187 वोट मिले और काँग्रेस तथा निर्दलीय उम्मीदवार आदि सबको मिला कर 976 वोट मिले। आगरा विभाग में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन को 2248 वोट मिले और काँग्रेस तथा निर्दलीय उम्मीदवार आदि सबको मिला कर 840 वोट मिले। पंजाब-लुधियाना-फिरोजपुर विभाग में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन को 1900 वोट मिले और काँग्रेस को 500 वोट मिले। (डॉ. बाबासाहेब बोल रहे थे तभी काँग्रेस पार्टी के विधायक दीवान चमनलाल ने बीच में ही उठ कर कहा, ‘डॉ. अम्बेडकर कोरी गप सुना रहे हैं!’ सुन कर डॉ. बाबासाहेब गुस्से से लाल हो गए और उन्होंने उनके शब्दों पर आपत्ति की। उस वक्त उन्होंने दीवान चमनलाल से कहा कि, जब मान्यवर डॉ. अम्बेडकर अपनी बात मुद्दों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं तब बीच में ही उठ कर इस प्रकार हल्ला मचाना ठीक नहीं है। सदन में उपस्थित किए गए मुद्दों का जब जवाब दिया जा रहा हो तब शांतिपूर्वक उनको सुना जाना चाहिए। उनकी बात बीच में काटते हुए - वे गप हांक रहे ऐसा कहा नहीं जा सकता। अध्यक्ष द्वारा इस प्रकार कान खींचे जाने पर दीवान चमनलाल ने अपना कथन वापिस लिया। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब ने अपना कथन जारी रखा।) मद्रास प्रांत के केवल एक ही जगह का आंकडे मैं देता हूं। अमलापुरम विभाग में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के उम्मीदवार को 10540 वोट मिले और काँग्रेस के उम्मीदवार को 2383 वोट मिले। प्राथमिक चुनावों से संबंधित आंकड़ों का यह हाल है। इसके आधार पर एक बात सहज ही साबित होती है कि प्राथमिक चुनाव के परिणामों को ही प्रतिनिधित्व की असली कसौटी मानी जानी चाहिए।
इन चुनावों में काँग्रेस ने सप्रमाण साबित कर दिया कि चुनाव नहीं, यह तो साफ धोखाधड़ी थी। इसके साथ ही, आज तक मैं अस्पृश्यों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र की जो लड़ाई लड़ते आया हूं उसे इस चुनाव के कारण भारी बल मिला है।
पंडित मालवीय ने एक और बात बताई कि हिंदू लोग अस्पृश्योद्धार की तरफ बहुत ध्यान दे रहे हैं। अस्पृश्यों के नैतिक उद्धार और विकास के लिए वे पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। इस बारे में, मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं कि बाहर जो भी कुछ हो रहा है उसे पल भर के लिए छोड़ भी दें और इस सदन की चारदीवारी के अंदर जो कुछ भी हो रहा है उसके आधार से अगर तय करें तब कोई भी निष्पक्ष आदमी यही कहेगा कि मालवीय के उपरिनिर्दिष्ट कथन में कोई तत्व नहीं है। यह बात सही है कि इस सदन में मुझे आए कुछेक दिन ही बीते हैं लेकिन इस सदन की रिपोर्ट मैं नियम से और ध्यान से पढ़ता रहा