342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 471

452 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

को आरक्षित जगहें दी गई हैं। वे आप लोग क्यों छोड़ते हैं? मैंने उनसे कहा, आप महार बनिए और पार्लियामेंट/एसेंब्लियों में उन जगहों को लें। नौकरीखाली हो तो जगहों को भरा जाता है। उनके लिए ब्राह्मणों की, अन्य लोगों की कितनी अर्जियां आती हैं। जैसे नौकरियों की जगहें भरी जाती हैं उसी प्रकार आप इन आरक्षित जगहों कोखुद महार बन कर क्यों नहीं भरते?

मेरा उनसे सवाल है कि अगर हमारा नुकसान होता है तो आप क्यों रोते हैं? असल में मनुष्य को अपनी इज्जत प्यारी होती है, लाभ नहीं। सदगुणी एवं सदाचारी महिला को व्यभिचार में कितना फायदा है इसका पता होता है। हमारी बंबई में व्यभिचारी महिलाओं की एक बस्ती है। वे महिलाएं सुबह नाश्ते के लिए पड़ोस के होटल में जाती हैं और कहती हैं - (डॉक्टरसाहब ने यहां आवाज बदल कर नकल करते हुए कहा) ‘अरे सुलेमान, खिमा की कटोरी और पावरोटी लेकर आना।’ सुलेमान लेकर आता है और साथ में चाय, पाव, केक भी लाता है। लेकिन मेरी दलितवर्गीय बहनों को सादी चटनी-रोटी तक नसीब नहीं होती। लेकिन वे इज्जत से रहती हैं। सदाचार का पालन करते हुए जीती हैं।

हम झगड़ रहे हैं इज्जत के लिए। मनुष्यमात्र को पूर्णावस्था में ले जाने की हम तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए जो जरुरी हो वे सभी त्याग करने के लिए हम तैयार हैं। अखबारों के ये लोग मेरे पीछे पिछले 40 सालों से लगे हुए हैं। उन्होंने आज तक मेरी कितनी आलोचना की। मेरा उनसे कहना है, सोच लो। कम से कम अब तो बच्चों-सी भाषा छोड़ कर बुजुर्गों की भाषा में बोलिए।

बौद्धधर्मीय होने के बावजूद हम राजनीतिक अधिकार प्राप्त करेंगे इसका मुझे पूरा-पूरा विश्वास है। (डॉ. बाबासाहेब की जयकार और तालियों की गूंज) मेरे मरने के बाद क्या होगा यह कहा नहीं जा सकता। इस आंदोलन के लिए बहुत बड़ा काम करना पड़ेगा। हमारे बौद्ध धम्म अपनाने से क्या होगा, कठिनाई आने पर उन्हें कैसे टाला जा सकता है, उसके लिए क्या तिकड़में और युक्तियां की जा सकती हैं। इस बारे में मैंने पूरा सोच लिया है। मेरी पोटली में सब कुछ भरा हुआ है। किस प्रकार से वह भरा है मैं जानता हूं। आज तक जो हक पाए हैं वे मैंने ही अपने लोगों के लिए हासिल किए हैं। जिसने एक बार हक हासिल करवा दिए वह फिर से हासिल करवाएगा ही। अधिकार और सहूलियतें मैंने ही उपलब्ध कराई हैं और मुझे यकीन है कि मैं फिर यह आपके लिए उपलब्ध करा सकता हूं। इसलिए, कम से कम अब आपको मुझ पर विश्वास कर आगे बढ़ना होगा। विरोध में प्रचार करने वालों की बातों में कोई दम नहीं है यह मैं आपको साबित करके दिखाऊंगा।

एक बात का बल्कि मुझे बड़ा आश्चर्य लगता है ।सब ओर इतना विवाद हो रहा है लेकिन किसीने मुझसे यह नहीं पूछा कि मैंने बौद्ध धर्म ही क्यों स्वीकारा। किसी भी धर्मांतरण आंदोलन का प्रमुख सवाल यह होता है कि किसी भी अन्य धर्म की जगह वही धर्म क्यों स्वीकारा गया? धर्मांतरण करते हुए कौन-सा धर्म स्वीकारना है और क्यों इस प्रश्न पर काफी