342 14-15-10-1956 बौद्ध धर्म से ही दुनिया का उद्धार होगा - नागपूर - Page 473

454 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ही क्यों? तुम बेटा तृतीय श्रेणी में ही रहना। प्रथम श्रेणी में आना तो ब्राह्मण का काम है।

ऐसे हालात में उस बच्चे में उत्साह कहां होगा? उसकी उन्नति कैसे होगी? उत्साह पैदा करने की जड़ मन में है। जिसका शरीर और मन तंदुरुस्त होगा, जो हिम्मत वाला होगा, विपरीत हालात से भिड़ कर पार पा सकता है। ऐसा विश्वास जिसके पास होगा, उसी के मन में विश्वास पैदा होता है और उसकी प्रगति होती है। हिंदू धर्म में कुछ ऐसी कुत्सित भावनाएं पैदा की गई हैं कि उत्साह महसूस ही नहीं होता। मनुष्य को हतोत्साहित करने वाली स्थितियां हजारों सालों तक टिकी रहीं तो उससे ज्यादा से ज्यादा क्लर्की करने वाले पैदा होंगे। इससे बेहतर और क्या हो सकता है? इन क्लर्कों की रक्षा करने के लिए बड़ा क्लर्क चाहिए।

मनुष्य के उत्साह अगर कोई कारण है तो वह है उसका मन। आप मिल मालिकों को जानते हैं। वे मिलों में मैनेजरों की नियुक्ति करते हैं और उनके जरिए मिल का काम करवा लेते हैं। मिल के मालिक किसी न किसी तरह के नशे के आदि होते हैं। उनके मन का सुसंस्कारपूर्ण विकास नहीं हुआ होता। अपने मन को उत्साह महसूस हो इसके लिए हमने आंदोलन किया और तब जाकर हमें पढ़ने का मौका मिला। मैंने लंगोट पहनकर पढ़ने की शुरूआत की। स्कूल में मुझे कभी पीने के लिए पानी तक नहीं मिला। पानी के बगैर मैंने स्कूल में कई दिन बिताए। मुंबई के एलफिन्स्टन कॉलेज में भी ऐसा ही हाल था। ऐसे हालात में और क्या निर्माण होना था? क्लर्की ही निर्माण होगी।

मैं दि८ी के एक्जीक्यूटिव कौंसिल में था, तब लॉर्ड लिनलिथगो भारत के वायसरॉय थे। मैंने उनसे कहा, आप आमखर्च तो करते ही हैं और मुसलमानों के लिए अलीगढ विश्वविद्यालय को तीन लाख रुपए शिक्षा के लिएखर्च देते हैं। उसी प्रकार बनारस के हिंदू विश्वविद्यालय के लिए भी आप तीन लाख रुपया देते हैं। लेकिन हम न तो हिंदू हैं न मुसलमान। हमारे लिए अगर कुछ करना हो तो उनकी तुलना में हजार गुना अधिक करना होगा। कम से कम हमारे लिए आपने मुसलमानों के लिए जितना किया है उतना तो कीजिए। तब लिनलिथगो ने बताया, आप इस बारे में जो कुछ लिख कर लाना चाहते हैं वह ले आइए। उनके अनुसार मैंने एक मेमोरेंडम लिखा। आज भी वह मेरे पास है। यूरोपियन लोग बड़े सहानुभूति वाले थे। उन्होंने मेरा कहा माना। लेकिन बात अड़ी इस बात पर कि यहखर्च किस मद में दिखाया जाए। उन्हें लगता था कि हमारी बेटियां पढ़ी-लिखी नहीं हैं। उन्हें पढ़ाना चाहिए। उनके लिए बो²डग्सखोलें और उस पर वे पैसेखर्च किए जाएं। हमारी बेटियों को अगर पढ़ा भी दिया जाए तो अलग-अलग व्यंजन बनाने के लिए घर में सामान कहां है? इसलिए, आखिर उनकी शिक्षा का असर क्या होगा? अन्य मदों की रकमें सरकार नेखर्च की और शिक्षा के लिए रखी रकम की राह में रोड़ा अटका के रखा।

इसलिए, एक दिन मैं लिनलिथगो के पास गया। शिक्षा के लिए रखी रकम के बारे