457
लोगों को खिचड़ी परोसी जाती थी। उस वक्त ईसामसीह के कौन अनुयायी बने? गरीब, पीडि़त लोग ही उनके अनुयायी बने। यूरोप की सभी गरीब और निम्न जाति की जनता ईसाई बनी। गिबन ने कहा भी था, ईसाई धर्म भीख मांगने वालों का है। यही ईसाई धर्म आज यूरोप में सभी का धर्म कैसे बना इसका जवाब देने के लिए आज गिबन जीवित नहीं हैं वरना इसका जवाब भी उन्हें देना पड़ता। कुछ लोग कहेंगे बौद्ध धर्म महार-मांगों का धर्म है। ब्राह्मण लोग भगवान बुद्ध को ‘भो गौतम’ यानी ‘अरे गौतम’ कहा करते थे। ब्राह्मण बुद्ध को इस प्रकार निम्न कोटि का कहते, उन्हें चिढ़ाते। लेकिन राम, कृष्ण, शंकर की मूर्तियां अगर बेचने के लिए विदेशों में रखी जाएं तो कितनी बिकेंगी यह देखिए। बुद्ध की मूर्ति रखें तो एक भी बाकी नहीं बचेगी। (तालियों की गड़गड़ाहट) अब घर में (भारत में) यह बहुत हुआ। बाहर भी कुछ करिश्मा दिखाइए। दुनिया में नाम है तो केवल बुद्ध का। सो, इस धर्म का प्रसार तो जरूर ही होगा।
हम अपनी राह जाएंगे आप अपनी राह जाएं। हमें नई राह मिल गई है। यह दिन उम्मीदों का है। यह अभ्युदय का उत्कर्ष का मार्ग है। यह कोई नई राह नहीं है। न इसे कहीं से ले आया गया है। यह राह यहीं की है। भारत की ही है। 200 सालों तक इस देश में बौद्ध धर्म था। असल में हमें इस बात काखेद है कि हम इससे पूर्व ही बौद्ध धर्म में क्यों नहीं शामिल हुए? भगवान बुद्ध के बताए सिद्धान्त अजर-अमर हैं। हालांकि बुद्ध ने ऐसा कोई दावा नहीं किया था। उसमें कालानुरूप बदलाव लाने की सुविधा है। इतनी उदारता किसी भी धर्म में नहीं है।
बौद्ध धम्म के समाप्त होने के प्रमुख कारण है मुसलमानों के आक्रमण। मुसलमानों ने आक्रमणों के दौरान मूर्तियां तोड़ीं। बौद्ध धम्म पर पहले आक्रमण उनके कारण हुए। उनके आक्रमणों से डर कर बौद्ध भिक्षु गायब हुए। कोई तिब्बत गया, कोई चीन, और कोई कहीं यहां-वहां गए। धर्म की रक्षा करने के लिए उपासकों की जरूरत होती है। पश्चिमोत्तर सरहद प्रांत में एक ग्रीक राजा था। उसका नाम मिलिंद। यह राजा हमेशा तर्क-वितर्क (चर्चा) में उलझा रहता था। उसे चर्चा का बड़ा शौक था। वह हिंदुओं से कहता जो वाकपट हैं वह आकर चर्चा करें। कइयों को उसने निरुत्तर कर दिया था।
एक बार उसे लगा कि उसे बौद्ध लोगों के साथ चर्चा करनी चाहिए। उसने कहा कि कोई चर्चा में बौद्ध हो तो उसे ले आएं। तब बौद्ध लोगों ने नागसेन से विनती की कि आप चर्चा में में बौद्ध लोगों का पक्ष सामने रखें। नागसेन विद्वान था। वह पहले ब्राह्मण था। नागसेन और मिलिंद के बीच जो चर्चा हुई उसे दुनिया जानती है। उस किताब का नाम है ‘मिलिंद पन्ह’। मिलिंद ने सवाल पूछा कि धर्म को ग्लानि क्यों आती है? नागसेन ने जवाब देते हुए इसके तीन कारण बताए।
पहला कारण यह कि, कोई धर्म कच्चा होता है। उस धर्म के मूल दर्शन में गंभीरता नहीं होती। वह कालिक धर्म बनता है। कुछ काल के लिए वह टिका रहता है।