343 15-10-1956 मुझे धर्म से बहुत प्रेम है और मैं उसी के लिए अपनी ताकत लगाऊँगा - नागपूर - Page 479

460 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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मुझे धम्म से बहुत प्रेम है और मैं उसी के

लिए अपनी ताकत लगाऊंगा

मध्य प्रदेश शे. का. फेडरेशन शाखा की ओर से 15 अक्तूबर, 1956 को शाम 5.30 बजे नागपुर के श्याम होटल में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के सम्मान में छोटी सी चाय-पार्टी (जलपान) दी गई थी। आयुष्मति माईसाहब भी इस समारोह में उपस्थित थीं। साथ ही, शे. का. फेडरेशन के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं में से बॅ. राजाभाऊखोब्रागडे, आयु. दादासाहब गायकवाड़, आयु. हरिदास आवलेबाबू, आयु. मेश्राम, आयु. कुंभारे, आयु. गोंडाणे, आयु. जी. टी. परमार (गुजरात), आयु. ए. जी. पवार, आयु. आर. डी. भंडारे और आयु. बी. सी. कांबले आदि उपस्थित थे।

पहले आयु. हरिदास आवले बाबू ने कार्यक्रम के लिए उपस्थित रह कर उपकृत करने के लिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के प्रति आभार व्यक्त किया और उनसे दलित फेडरेशन के कार्यकर्ताओं को उद्देश्य कर दो शब्द कहने की विनति की।

उनकी प्रार्थना का आदर करते हुए डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर ने हिंदी में भाषण दिया सम्बोधित करने के लिए उन्होंने कहा-

यहां मुझे बोलना पड़ेगा, इसकी मुझे जानकारी नहीं थी। पता होता तो अपने विचारों को संकलित कर उन्हें आपके सामने रखने की सहूलियत होती। कुल मिला कर मुझे लगता है कि आप लोगों को राजनीति से लगाव है। अन्य किसी भी बात से बढ़ कर आपको राजनीति प्यारी है ऐसा लगता है। मेरी बात अलग है। मुझे धर्म अधिक प्यारा है। और उसी के लिए मैं अपनी शक्ति लगाने वाला हूं।

आपको कुछखास अधिकार दिलाने के लिए मैंने आज तक बहुत प्रयास किए। मैंने उसके लिए गांधी से झगड़ा किया, काँग्रेस का सामना किया। उस वक्त पहली बार मुंबई एसेंब्ली में हमारे 15-16 लोग चुन कर आए। एसेंब्ली में हमने विरोधी पार्टी के रूप में काम किया। हमारा काम इतना अच्छा था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री आयु.खेर को कहना पड़ा कि हमारा काम एसेंब्ली का आदर्श विरोध था। उसके बाद लड़ाई शुरू हुई। लड़ाई के दौरान कुछ विशेष काम नहीं कर पाए।

हमारे देश के आजाद होने के बाद देश का संविधान लिखते समय हमारे अधिकारों

प्रबुद्ध भारत - अम्बेडकर बौद्ध दीक्षा विशेषांक, 27 अक्तूबर, 1956