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राजनीति में भक्ति अगर विभूति पूजा की जगह लेती है तो
तानाशाही निर्माण होने काखतरा पैदा हो जाता है
दिनांक 15 अक्तूबर, 1956 के दिन नागपूर कॉर्पोरेशन की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का सम्मान किया गया। इस सम्मान समारोह में शहर के सभी नगरपालक और प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित थे। सम्मान के लिएखास मंच का प्रबंध किया गया था। यह समारोह शाम 6 से 8 बजे के बीच संपन्न हुआ। सभा पांडालखचाखच भरा हुआ था। बाहर सड़क के दोनों तरफ काफी भीड़ इकट्ठा हुई थी।
पहले नागपुर कार्पोरेशन के मेयर आयु. रा. पै. समर्थ ने मुद्रित प्रशस्ति पत्र पढ़ कर सुनाया। मानपत्र इस प्रकार था-
मानपत्र
भारतीय बहुजन समाज की मूक भावनाओं की साकार मूर्ति
सम्माननीय डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर
एम. ए. पीएच डी. डी. एससी. बार एट-लॉ
आप जैसे समाजसुधारक, ज्ञानी और विधिविज्ञ पंडित का स्वागत करने का सौभाग्य नागपूर की जनता को मिला इसका हमें परमहर्ष हो रहा है।
वैसे देखा जाए तो नागपूर शहर से आपका घनिष्ठ संबंध रहा है। महान परिश्रम से विद्याध्ययन पूरा करने के बाद आपने 1930 में इसी शहर में अस्पृश्य जनता परिषद बुला कर देश की अस्पृश्य जनता का मार्गदर्शन किया था। यहीं से आपके सामाजिक और राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई है। इसी नगर में 1942 में अखिल भारतीय शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन का निर्माण कर अस्पृश्य समाज की राजनीतिक आकांक्षाओं का निनाद आपने पूरे भारतवर्ष में पहली बार पहुंचाया और आज इसी नगर में अपने उत्तर जीवन में बौद्ध धर्म की दीक्षा लेकर आप अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं।
आपके बहुमुखी जीवन पर नजर डालें तो पता चलता है कि आपका पिंड प्रगाढ़ पंडित का होने के बावजूद उसे केवल तार्किक विवेचन तक सीमित न रख कर प्रत्यक्ष कार्यक्षेत्र में भी आपने स्वयं को साबित किया। कई शतकों से धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक मामलों में पीडि़त अस्पृश्य समाज की मूक और करुण चीत्कारों से आपका हृदय पिघला और आपने अनवरत उनकी सेवा का व्रत धारण किया।