464 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
महाड का ‘चवदार तालाब सत्याग्रह, नासिक का कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह ऐसे कितने ही प्रसंगों ने आपकी अग्निपरीक्षा ली और आपके जीवन को और उज्जवल बनाया है। ‘वन्ही तो चेतवावा रे, चेतविताची चेततो! केल्याने होत आहे रे आधी केलेचि पाहिजे’ (अर्थ - आग जलानी पड़ती है, जलाने से ही जलती है। किए से ही सब होता है, पहले करना पड़ता है।) - इस उक्ति के अनुसार अस्पृश्य समाज की आत्मा आपके अविरत परिश्रमों से जागी और उसने अपने सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए आपके नेतृत्व में संघर्ष की शुरुआत की। इसी के फलस्वरूप लंदन शहर में बुलाई गई गोलमेज परिषद में अस्पृश्य समाज का प्रतिनिधित्व करने के लिए केवल आपको चुना गया। गोलमेज परिषद में आपका काम अती प्रशंसनीय रहा है।
अपने इन असामान्य गुणों के कारण ही 1942 में उस वक्त के भारत सरकार ने आपकी श्रम मंत्री के तौर पर नियुक्ति की और आपने जिम्मेदारी बेहतरीन ढंग से सम्भाली। श्रमजीवि वर्ग की आपने अपरिमित सेवा की।
परतंत्रता की अंधेरी रात के बाद भारत के क्षितिज पर आजादी के सूरज का उदय हुआ। आजादी के सूरज के प्रकाश से हर भारतीय का जीवन तेजोमय हो, इसलिए भारतीय सार्वभौम गणराज्य का संविधान बनाने की बात तय हुई। संविधान समिति ख्’, (समिति की जगह ‘मसौदा समिति’ होना चाहिए था - संपादक) में आपको चुना गया और आप इस समिति के अध्यक्ष बने। समता, आजादी और बंधुभाव इन तीनों की नींव पर बनाए गए सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्यायपूर्ण हकों के राष्ट्रीय संविधान का जन्म आपके नेतृत्व में हुआ। भारतीय संविधान के शिल्पकार के तौर पर आपको उपाधि भारतीयों ने बहाल की। भारतीय संविधान आपकी कीर्ति भारतवर्ष में चिरकाल तक बनाए रखेगी इसका हमें विश्वास है। साथ ही, जब आप आजाद भारत के कानून मंत्री थे तब आपने हिंदू कोड बिल के रूप में भारतीय महिलाओं के हकों का जो समर्थन किया उसका कोई सानी नहीं। युगों-युगों तक भारतीय स्त्री वर्ग आपकी सेवा के लिए आपके प्रति कृतज्ञ रहेगी।
शिक्षा के बगैर जीवन पवित्र और तेजस्वी नहीं बनता यह पहचान कर बहुजन समाज के जीवन में उसका प्रसार करने के लिए कई मुसीबतों का सामना करते हुए आपने मुंबई में पीपल्स एज्युकेशन सोसाइटी नाम की संस्था की स्थापना की। और उसके सहारे मुंबई में सिद्धार्थ महाविद्यालय और औरंगाबाद में मिलिंद महाविद्यालय की स्थापना कर बहुजन समाज के लिए उच्च शिक्षा का महाद्वारखोल दिया। बाबासाहेब आपका संपूर्ण जीवन बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय हीखर्च हुआ है बहुजनों की उन्नति के अलावा राष्ट्र उन्नत नहीं होगा - आपकी इस सोच से कोई असहमत नहीं हो सकता।
आज के अशांत युग में शांति और अहिंसा का सिद्धान्त आशा की किरण दिखा कर