344 15-10-1956 राजनीति में भक्ति अगर विभूती पूजा की जगह लेती है तो तानाशाही निर्माण होने का खतरा पैदा हो जाता है - नागपूर - Page 485

466 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है। इंग्लैंड में प्रजातंत्रात्मक पद्धति है और हमारे यहां तानाशाही का उदय हुआ है ऐसा दिखाई दे रहा है। हमारे देश के कामकाज में दिखाने में और करने में अलग तरीके से कामकाज चल रहा है। हमारे देश का संविधान किस प्रकार काम करता है इस बारे में आप सोचते हैं कि नहीं, मैं नहीं जानता। लोगों को अब प्रशासन और संविधान के बारे में जागरुक रहना चाहिए। भारत के नए संविधान का मैं निर्माणकर्ता इसलिए अभिमान से कहता हूं ऐसी बात नहीं है, लेकिन निर्माणकर्ता होने के कारण हमेशा मुझे ऐसा लगता रहा है। सोचते हुए कभी यह भी लगता है कि इस देश का आखिर क्या होगा और एक भयानक तस्वीर आंखों के सामने साकार होती है।

अब मुझे चुनाव का शौक नहीं रहा। मैंने राजनीति देखी है। काँग्रेस के शासन में जाति-पांति के भेदों के कारण इस देश की राजनीति अब ऐसी बनी है कि अल्पसंख्यक जनजातियों के जीने का कोई सहारा नहीं रहा। इसके बावजूद मैं राजनीति से अलग नहीं होऊंगा। जातिवाद के कारण कई बार मुझे असफलता का ही मुंह देखना पड़ा है इसके बावजूद मैं लडूंगा। मैं अपनी राजनीति जारी रखूंगा। बल्ला छोड़ कर मैं तंबू में लौटूंगा नहीं। (हंसी और तालियां)

मैं इंग्लैंड का प्रशासन और अपने देश के प्रशासन के बारे में बता रहा था। इंग्लैंड और भारत में प्रमुख फर्क यह है कि हमारे यहां मतदाता को उम्मीदवार चुनने का अधिकार नहीं है ऐसा लगता है। वहां मतदाता ही उम्मीदवार का चुनाव करते हैं। उनके चुनाव क्षेत्र के जो मतदाता होते हैं उन्हें- कौन सा उम्मीदवार कैसा है, उसकी शिक्षा कहां तक हुई है, उसका चाल-चलन या चरित्र कैसा है, उसमें समाज सेवा भाव कितना है आदि बातों की जानकारी होती है। उसी के आधार पर वे अपना उम्मीदवार चुनते हैं। हमारे देश में इस बारे में कुछ और ही तरह का मामला है। किस चुनाव क्षेत्र से कौन से उम्मीदवार कोखड़ा करना है इसकी आजादी अभी तक हमारे मतदाताओं को नहीं है। आज काँग्रेस की चुनाव संबंधी जो नीति है उससे आपको पता चलेगा कि किस चुनावक्षेत्र से किसेखड़ा किया जाए इस बात का फैसला दिल्ली हाईकमांड करती है। इस बारे में चुनाव क्षेत्र के मतदाताओं को कोई जानकारी नहीं होती। हाइकमांड द्वाराखड़ा किया गया उम्मीदवार कैसा है, उसका चरित्र कैसा है, उसने कुछ कालाबाजारी या घोटाला किया है क्या, वह भ्रष्टचारी है क्या, समाज की भलाई के लिए वह विधानसभा अथवा लोकसभा में जनहित के मामले उठायेगा या नहीं। आदि बातों से काँग्रेस हाइकमांड ने लोगों का कोई ता८ुक बाकी नहीं रखा है। हम जिसे कहें उसे आपको वोट देना ही पड़ेगा ऐसा काँग्रेस हाइकमांड का उसूल है। काँग्रेस अगर किसी गधे को भी उम्मीदवार बनाती है तो आप उसे अपना वोट देंगे। सड़क केखंभे को वोट देने के लिए काँग्रेस कहे तो सड़क केखंभे को भी अपना वोट देंगे। क्या इसी को आप प्रजातंत्र कहते हैं? यह प्रजातंत्र परखुला प्रहार है। ऐसी पद्धति राष्ट्र के लिए घातक है।