344 15-10-1956 राजनीति में भक्ति अगर विभूती पूजा की जगह लेती है तो तानाशाही निर्माण होने का खतरा पैदा हो जाता है - नागपूर - Page 487

468 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तब उन्होंने कहा, ‘ऐसे बेकार केखत मेरे पास हजारों में आते हैं। उन्हें नजरंदाज कीजिए। मालवणकर से पूछिए।’ यह कैसा जवाब हुआ? बड़ोदा की महिला तुम्हारा नाम बदनाम कर रही है, यही मैं उन्हें समझाना चाहता था। लेकिन उन्होंने कहा कि- इस तरह के हजारोंखत आते हैं। इसे क्या अपने चरित्र के बारे में जागरुकता कहें? इन सभी बातों पर आपको अच्छी तरह सोचना होगा। पार्लियामेंट जाने वाली महिलाएं इस प्रकार बहकी हुई होंगी तो उन्हें वहां जाने देने के पीछे काँग्रेस का क्या प्रयोजन है?

काँग्रेस की राजनीति का एक और उदाहरण लीजिए। हमारे मुंबई राज्य के मोरारजी देसाई कहते हैं मुझे निर्विरोध चुनिए और किसे मंत्री लेना है मैं तय करूंगा। एक बार चुनने के बाद मेरे कामकाज में कोई दखलंदाजी नहीं करेगा। अब इसे क्या कहेंगे आप ही तय कीजिए। कल मान लीजिए कि मोरारजी को चुना गया और वे अगर अपने मंत्रिमंडल में किसी कुत्ते की नियुक्ति करें तब भी किसी को दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए, यही उनके कहने का मतलब हुआ। इंग्लैंड की प्रशासन पद्धति हमने अपनाई है तो उसमें यह क्या चल रहा है? उस जगह सत्तापक्ष के सदस्य पार्लियामेंट में पहली पंक्ति में बैठते हैं उनकी अनुमति से ये बातें तय की जाती हैं। किसी को एक बार चुने जाने के बाद और कोई भी उसमें दखल नहीं देगा ऐसा वहां कोई किसी से नहीं कहता और ऐसा कहना माना भी नहीं जाएगा। लेकिन मोरारजीभाई जैसे लोगों का कहना है कि वे जो कहेंगे वही होगा। कल अगर मोरारजी मरे तो क्या उनकी जगहखाली रखी जाएगी? पहले विधवा का पुनर्विवाह नहीं होता था, लेकिन अब वैसा नहीं रहा। जर्मनी में हिटलर की तानाशाही थी। उसके अकेले की मर्जी के अनुसार उसे प्रशासन चलाना था। मोरारजी कहां कुछ अलग कह रहे हैं? ऐसे अजीब वाकये इसी देश में और काँग्रेस के जरिए ही हो सकते हैं। कई लोग इसके क्या भयानक परिणाम भुगतने पड़ेंगे इसके बारे में जानते तक नहीं हैं। काँग्रेस की वर्तमान सरकार की सुएज नहर के बारे में नेहरू की नीति की बात लीजिए। मिस्त्र के राष्ट्रपति नासेर ने उस नहर का राष्ट्रीयकरण किया है। उसका समर्थन कर नेहरू ने अपरिपक्वता का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मामले में महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि दुनिया का व्यापार जिस नहर के मार्ग से होने वाली यातायात पर निर्भर करता है उसे किसी एक राष्ट्र के नियंत्रण में होना चाहिए या अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में होना चाहिए? भारत का बहुत बड़ा व्यापार इसी नहर के रास्ते होता है। जवाहरलाल नेहरू कहते हैं इसीलिए सुएज नहर का राष्ट्रीयकरण कीजिए ऐसा सब लोग कहते हैं। लेकिन अगर नासेर ने भारत के पानी के जहाजों की नहर से आवाजाही पर रोक लगा दी तो सोचिए हमारी विकास योजनाओं का क्या होगा? आज नासेर आपका दोस्त है, कल अगर वह नहर से हमारा यातायात बंद कर दे तो हमारा क्या होगा?

इस देश में भक्तियोग बहुत जड़ें जमा चुका है। भारत का संविधान तैयार होने के बाद