346 15-11-1956 दुखनिवारण का मार्ग दिवाना बौद्ध धर्म का अंतिम उद्देश्य - काठमांडू - Page 491

472 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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बौद्ध धम्म का अंतिम उद्देश्य है दुख निवारण का मार्ग दिखाना

भारत के पूर्व कानून मंत्री डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और आयुष्मती सविता अम्बेडकर आज दिनांक 13 नवंबर, 1956 को दोपहर दुनिया के बौद्धधर्मी लोगों की चौथी विश्व परिषद में भाग लेने के लिए काठमांडू में पधारे। काठमांडू हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। नेपाल सरकार की ओर से चीफ ऑफ प्रोटोकॉल भिक्षु कौशल्यायन, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्वयंसेवक और महिला-पुरुषों के बड़े समूह उनके स्वागत के लिए उपस्थित था। डॉ. अम्बेडकर पति-पत्नी के हवाई जहाज से उतरते ही ‘अम्बेडकर जिंदाबाद’ के जोरदार नारे लगाते हुए जुलूस निकाल कर उन्हें नेपाल सरकार के ‘सितल महाल’ ले जाया गया। नेपाल सरकार केखास मेहमान बन कर वे वहां रहने वाले हैं।

डॉ. अम्बेडकर की सेहत अच्छी है और लगता है कि नेपाल का मौसम रास आया है। काठमांडू के अस्पृश्य समाज के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने तथा महिला संगठनों के प्रमुखों ने आज रात डॉ. अम्बेडकर से मुलाकात कर नेपाल के अस्पृश्यों के बारे में उन्हें जानकारी दी।

दुनिया के बौद्ध धर्मीय लोगों की चौथी विश्व परिषद दिनांक 15 नवंबर से शुरू हो रही है। इस परिषद में हिस्सा लेने के लिए दुनिया के विभिन्न देशों से बौद्ध भिक्षु, भिक्षुणी, प्रतिनिधि, विशेष आमंत्रित प्रमुख व्यक्ति, ऑब्जर्वर्स आदि को मिला कर 625 लोगों को आमंत्रण भेजा गया है परिषद का आयोजन काठमांडू की धर्मोदय सभा की ओर से किया गया। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर पति-पत्नी को नागपूर में बौद्ध धर्म की धर्म दीक्षा देने वाले कुशीनगर के 83 साल के महाथेरो भिक्षु चंद्रमणी आए हैं और उनकी तीसरी टुकड़ी में पांच लोग थे। उनका नेतृत्व भिक्षु चंद्रमणि ने ही किया था। भारत से आए भिक्षुओं में भिक्षु चंद्रमणी के अलावा वर्धा के (नागपूर) भिक्षु भदंत आनंद कौशल्यायन, वेणुवन विहार अगरतला (त्रिपुरा, कोलकाता) के भिक्षु आर्यमित्र भी आज हवाई जहाज से काठमांडू में दाखिल हुए हैं। ख्1,

पं. राहुल सांकृत्यायन परिषद के लिए आए थे। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर से मुलाकात की। उस वक्त हुई बातों के बारे में वह लिखते हैं - ‘‘नवंबर 1956 का वह दिन नहीं भूल सकता। जबकि नेपाल में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने बड़े भावावेश में पर गंभीरता के साथ घोषित किया था - दो वर्ष और जी जाऊं तो भारत में पांच करोड़ बौद्धों को दिखा दूंगा। हजार अफसोस कि वह संकल्प पूरा नहीं हो सका।’’ ख्2,

विश्व बौद्धधर्मीय सम्मेलन के चौथे साल में दुनिया के चौंतीस राष्ट्रों ने परिषद में हिस्सा लिया है और उनमें प्रमुख हैं बर्मा, कनाडा, सिलोन, चीन, जेकोस्लोवाकिया, इस्थोनिया,

  1. प्रबुद्ध भारत, 24 नवंबर, 1956

  2. आधुनिक संसार का महान व्यक्तित्व - डॉ. अम्बेडकरः महापंडित राहुल सांकृत्यायन, पृष्ठ 8