476 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ही है, बल्कि बौद्ध धम्म ही एकमात्र सर्वोत्तम जीवनमार्ग है यह बताना बेहद आवश्यक है। इस बात का यकीन दिलाने के बाद ही बौद्ध धर्म के बने रहने की उम्मीद की जा सकती है। हमें एक और बात ध्यान में रखनी होगी कि यूरोप के बहुसंख्य लोग और एशिया के बहुसंख्य युवाओं का यह नजरिया है कि आज की दुनिया में केवल कार्ल मार्क्स ही पूजनीय महापुरुष या दूत है। साथ ही, वे ऐसा विचार भी प्रकट करते हैं कि बौद्ध भिक्खु संघ का बहुत बड़ा हिस्सा बेकार ही नहीं तो एक बहुत बड़ा गम्भीर संकट है। इस प्रकार की मानसिकता किस चीज का लक्षण है इस बात की ओर भिक्षुओं को ध्यान देना होगा। उसकी पृष्ठभूमि को उन्हें समझना होगा। कार्ल मार्क्स के साथ तुलना की जा सके इस प्रकार उन्हें अपने आप को ढाल लेने की पूरी-पूरी कोशिश करनी होगी। तभी बौद्ध धर्म की श्रेष्ठता साबित की जा सकती है।
इस भूमिका के बाद मैं आपको बौद्ध दर्शन और मार्क्सवाद या साम्यवाद के प्रमुख विशिष्ट मुद्दों के बारे में विस्तार से बताऊंगा। इसके तहत बुद्ध-दर्शन और मार्क्स दर्शन के आदर्शों में समानता और भेद के बारे में मैं आपको बताऊंगा। जीवन के उद्देश्यों की पूर्ति करने में साम्यवादी जीवनमार्ग से अधिक बौद्ध जीवनमार्ग चिरंतन हो पाएगा अथवा नहीं इसका भी मैं विस्तार से विवेचन करूंगा। जो जीवनमार्ग अल्पकालिक है, वह जंगलों में भटकाने वाला हो सकता है या अराजकता की ओर ले जाने वाला हो सकता है। ऐसे जीवनमार्ग का पीछा करना उचित नहीं होगा।
लेकिन जिस मार्ग का भरोसा करने के लिए आपसे कहा जाए वह अगर मंद गति वाला हो और बहुत अधिक अंतर वाला हो, लेकिन भरोसेलायक, सुरक्षित और मजबूत बुनियाद वाला हो_ आपके आदर्श सिद्धांतों के लिए सहायक हो, आपके जीवन को स्थायीत्व देने वाला हो तो उसी मार्ग को अपनाना योग्य रहेगा।
कम दूरी वाला, ‘शॉर्टकट’ के तौर पर पहचाने जाने वाले कंटीले रास्ते से मंद गति वाला, लंबी दूरी तय कराने वाले मार्ग पर चलते रहना ही योग्य साबित होगा। जीवन के शॉर्टकट हमेशा जोखिम भरे और धोखा देने वाले होते हैं। केवल धोखेबाज नहीं, महा धोखेबाज होते हैं यह बात हमेशा ध्यान में रखनी होगी।
अब मैं अपने मुख्य विषय पर आता हूं। मार्क्स की साम्यवादी विचारधारा में आखिर है क्या? उसका बुनियादी दर्शन क्या है? इसलिए साम्यवादी विचारधारा का मूल आरंभ यह है कि इस दुनिया में शोषण हो रहा है। अमीरों द्वारा गरीबों का शोषण हो रहा है। क्योंकि अमीरों को संपत्ति की लालसा है। वे अधिकाधिक धन-संपत्ति चाहते हैं और इसके लिए वे जनसमुदाय को गुलाम बनाते जा रहे हैं। इस गुलामी के कारण आखिर यातना, दुख, गरीबी का निर्माण होगा। यही मार्क्सवाद के प्रारंभ की जड़ है। मार्क्स ने शोषण शब्द का प्रयोग किया है। इस शोषण को समाप्त करने के लिए मार्क्स ने क्या उपाय बताए है? जिनका