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शिक्षा के अनुसार मनुष्य की मनोधारणा में बदलाव आए बगैर दुनिया में सुधार या उन्नति संभव नहीं। इंसान की मनोधारणा बदले और उसके अनुसार वह साम्यवादी विचारधारा को स्वीकार कर उस पर निष्ठा के साथ प्रेम करे, उसे अमल में लाने की कोशिश करे तो निश्चित रूप से उसे स्थायी स्वरूप प्राप्त हो सकता है। ऐसी स्थितियों में इंसान को कायदे-कानून की बेडि़यों में जकड़ने के लिए सैनिक या पुलिस कार्रवाई की षरूरत ही नहीं पड़ेगी। ऐसा क्यों होगा? इसका जवाब यह है कि, बुद्ध जब नैतिक व्यवहार और सही रास्ते पर चलने के लिए आपके मन को तैयार करेंगे तो आपका मन हमेशा के लिए सतमार्ग पर चलने वाला बनेगा, तब किसी बाहरी शक्ति की आपको सही मार्ग पर ठेलते रहने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
साम्यवाद के निराकरण के संदर्भ में जो विचार हैं वे जोर-जबर्दस्ती पर आधारित हैं। कल्पना कीजिए कि कल अगर रूस की साम्यवादी तानाशाही नाकाम रही या ऐसे लक्षण दिखाई देने लगे तो क्या होगा? साम्यवाद की स्थिति क्या होगी यह जानने की उत्सुकता मुझे रहेगी। मेरी कल्पना के अनुसार राज्य की मालिकाना हक वाली संपत्ति पर अधिकार करने के लिए रूसी लोगों के बीचखूनी लडाइयां होंगी। यह अपरिहार्य परिणति रहेगी। क्योंकि रूस के लोगों ने स्वेच्छा से या सहज रूप में साम्यवाद को नहीं स्वीकारा है। उन पर वह जबरदस्ती लादा गया है। साम्यवाद को स्थापित करते समय उन्हें यह कह कर डराया गया कि अगर वे साम्यवादी विचार प्रणाली नहीं मानेंगे तो उन्हें फांसी पर लटकाया जाएगा और इसीलिए वे अब तक साम्यवाद को चुपचाप झेल रहे हैं। ध्यान में रखना होगा कि डर के कारण कोई विचारधारा जड़ें नहीं पकड़ सकती। कोई विचारधारा ग्रहण की गई, लेकिन समयान्तर से उसकी धारणाशक्ति नष् हुई तो उस विचारधारा का आगे क्या होगा इस सवाल का जब तक कोई जवाब नहीं दिया जाएगा तब तक वह लोगों के मन में जगह नहीं पा सकती। मनोभूमिका अगर नहीं बनाई जाए तो हमेशा सत्ता की जरूरत महसूस होगी। इसी कारण हमेशा मुझे बुद्ध का आकर्षण लगता रहा है। बुद्ध की विचारधारा प्रजातंत्र की विचारधारा है।
अजातशत्रु वज्जी को जीतना चाहते थे। यह बताने के लिए अजातशत्रु का सेनापति बुद्ध के पास आया। बुद्ध ने उससे कहा कि वज्जी जब तक अपनी पुरानी पद्धति के अनुसार राज्य चला रहे हैं तब तक उन्हें परास्त करना संभव नहीं। बुद्ध ने वज्जी की पद्धति का स्पष्टीकरण क्यों नहीं किया यह पता नहीं चलता है। लेकिन जिस बारे में वह बोले वह वज्जियों की प्रजातांत्रिक और गणतंत्रप्रधान राज्यशासन के बारे में ही कहा इसमें कोई शक नहीं। इसीलिए बुद्ध ने कहा कि, वज्जी जब तक अपने पुराने तरीकों पर चलेंगे तब तक वे कभी भी परास्त नहीं होंगे। इससे पता चलता है कि बुद्ध प्रजातंत्र के बड़े समर्थक थे।