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ने पानी से उनके पैर धोए। फिर वे चौरंग पर बैठे। हवा करने के लिए उनके हाथ में एक हाथपंखा था। वे कुछ बुदबुदाए। लेकिन क्या बुदबुदाए यह केवल उनको ही पता। अर्थात् उन्होंने वह धम्मप्रसार सिंहली भाषा में किया होगा। लेकिन वह भी केवल दो मिनटों तक ही! उसके बाद उठ कर वह चले गए।
आप ईसाइयों के गिरजाघर में जाकर देखिए। वहां क्या होता हैघ् वहां हर हफते लोग इकठ्ठा होते हैं। वहां वे प्रार्थना करते हैं। उनका धर्मगुरू बाइबिल के किसी विषय पर प्रवचन करता है और बताता है कि ईसा ने क्या कहा है यह समझाता है। उस सदुपदेश का बार-बार स्मरण करने के लिए लोगों को आवाहन करता है। आपको यह सुन कर आश्चर्य लगेगा कि ईसाई धर्म का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा तत्वतः और रचनात्मक नजरिए से देखा जाए तो बौद्ध धम्म से ही लिया गया है। आप रोम जाएंगे और वहां का प्रमुख गिरजाघर देखेंगे तो आपको बरबस यहां के विश्वकर्मा मंदिर की याद आएगी।
चीन में विशबिग्ने नाम का एक ईसाई धर्मप्रसारक था। उसने बौद्ध धर्म पर एक किताब भी लिखी है। बौद्ध धर्म और ईसाई धर्म में मौजूद कमाल की समानता के बारे में उसने आश्चर्य प्रकट किया है। ऊपरी तौर पर भले वह यह नहीं कह रहा कि बौद्धों ने ईसाइयों की नकल उतारी है कहने का साहस नहीं कर रहा हो तब भी ईसाइयों ने बौद्ध धर्म की नकल की है यह बात भी मानने के लिए वह तैयार नहीं है। इस बारे में बताने लायक बहुत कुछ है।
अब समय बहुत बदल गया है। ईसाइयों ने बौद्ध धर्म की नकल उतारी है इसमें कोई शक नहीं। लेकिन धर्म प्रसार के लिए ईसाइयों द्वारा स्वीकृत मार्ग की बौद्ध लोग अपने धम्म प्रसार के लिए नकल करें तो इसमें कोई हर्ज नहीं होना चाहिए। भले वह अपनी राह से भटक जाएं तो भी बुद्ध का धम्म उनके मार्गदर्शन के लिए किसी पुलिसवाले की तरह हमेशाखड़ा मिलेगा। यह बात जब तक लोग नहीं मानते तब तक बौद्ध धम्म का ”ास रोका नहीं जा सकता। आज भी बौद्ध राष्ट्रों में बौदध धर्म की बहुत बुरी हालत है। इसके बावजूद लोगों के मन पर आज भी बौद्ध धर्म की पकड़ कायम है इसमें कोई शक नहीं।
चलते-चलते मैं एक मनोरंजक और महत्वपूर्ण बात बताना चाहता हूं। मैंने वह बात ब्रह्मदेश में देखी। वहां मुझे एक परिषद के लिए बुलाया गया था। तब ब्रह्मदेश में गांवों की पुनर्रचना किस प्रकार की जा रही है यह दिखाने के लिए वे मुझे एक गांव ले गए थे।
मुझे बहुतखुशी हुई। वहां की एक कमेटी द्वारा गांव की पुनर्रचना का ढांचा बनाया हुआ था। उस गांव के सारे रास्ते अन्य किसी भी गांव की तरह टेढ़े-मेढ़े और अव्यवस्थित थे। उन्हें उन रास्तों को सीधा करना था। उसके लिए उस कमेटी ने लोहे केखंभे गाड़ कर सीधे रस्सियां बांधी और रास्तों को सीधे करने का मार्ग तय किया। मैंने देखा कि