488 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
करना चाहिए। उस विरोध को भुला कर अगर आप ढुलमुल जीवन जिएंगे तो आपकी शिक्षा व्यर्थ है ऐसा मानना पड़ेगा। इस प्रकार अपने विचार व्यक्त कर बाबासाहेब ने अपना भाषण पूरा किया।
हिंदू संस्कृति को चिरस्थायी रूप देने के लिए पंडित मालवीय द्वारा स्थापित किए बनारस विश्वविद्यालय में दिया गया बाबासाहेब का ऊपर्युक्त भाषण सभी श्रोताओं ने बड़ी शांति से सुना। बाबासाहेब की अधिकारपूर्ण वाणी का और ठोस सवालों का श्रोताओं पर इतना प्रभाव था कि कुछ अनुचित कर सभा को तितर-बितर करने के लिए आगे बढ़े छात्र भी ऐसे स्तब्ध थे मानो उन पर किसी जादू का असर हो। भाषण के बाद आयोजित जलपान के समय एक अध्यापक ने कहा भी कि ऐसे विवादित विषय पर इतनी निर्भयता से और इतना स्पृतापूर्ण भाषण बिना किसी विरोध के पूरा हो पाया यह विश्वविद्यालय की एक नूतन (नई) बात है।’’ ख्2,
- प्रबुद्ध भारत, 10 अगस्त, 1957