349 24-11-1956 हर रविवार के दिन बुद्धविहार में जाना हर बौद्ध धर्मीय का आद्य कर्तव्य है - सारनाथ - Page 508

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हर रविवार के दिन बुद्धविहार जाना हर बौद्ध धम्म अनुयायियों का

पहला कर्तव्य है

दिनांक 24 नवंबर, 1954 को दोपहर 1 बजे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर काशी से सारनाथ आए। वे वहां के भिक्षुओं से मिले। उनसे चर्चा करते समय बाबासाहेब ने मुख्यतः इस बात पर जोर दिया कि हर रविवार के दिन हर बौद्ध को नियमित रूप से बुद्ध विहार में जाकर उपदेश ग्रहण करना चाहिए। इसी प्रकार उन्होंने हर विभाग में बुद्ध विहार निर्माण कर उसमें सभा लेने के लिए काफी जगह वाला सभागृह होना जरुरी है यह बात भी जोर देकर कही। इस नजरिए से सिलोन, ब्रह्मदेश, तिब्बत, चीन आदि देशों के भिक्षुओं ने आगे बढ़ कर और पैसा इकट्ठा कर मदद करने की सलाह दी। ख्1,

इस अवसर पर उपस्थित लोगों और भिक्खुओं को संबोधित करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-

‘‘जनता को अब गंभीरता से सोचना होगा। हिंदू धर्मग्रंथों में जिस जीवन का वर्णन किया है उसका और हमारे द्वारा तैयार किए गए संविधान में क्या कोई समानता है? अगर नहीं, तो उसके क्या कारण हो सकते हैं? अपना धर्म या संविधान इन दोनों में से किसी एक बात का हमें स्वीकार करना होगा। या तो धर्म को जिंदा रखना होगा या फिर संविधान को ही जगाना होगा। दोनों बातें एक ही जगह नहीं रह सकतीं, दोनों में कोई मेल नहीं हो सकता।

हिंदू धर्म में कई मत हैं। उसमें शंकराचार्य का मत सबसे अच्छा माना जाता है। शंकराचार्य का ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ का सिद्धांत सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन बौद्ध धम्म के उच्च सिद्धांतों के आगे वह बेहद तुच्छ और निरर्थक है। नए-नए बने बौद्धों का आद्य कर्तव्य है कि वे हर रविवार के दिन बौद्ध विहार में जाएं। वरना नए बौद्धों का धम्म से परिचय नहीं होगा। इसके लिए जगह-जगह बुद्ध विहार का निर्माण होना चाहिए। विहार में सभा लेने के लिए जगह होनी चाहिए। लंका, बर्मा, तिब्बत, चीन आदि देशों के बौद्ध भिक्षु आगे बढ़ कर पैसा इकट्ठा करें और भारत के बौद्ध लोगों की मदद करें।

आज सुबह उत्तर प्रदेश के पूर्व सभापति आयु. द्वारकाप्रसाद मुझे मिले थे। उनका

1.धर्मदूत मासिक, दिसंबर, 1956, पृ. 244