349 24-11-1956 हर रविवार के दिन बुद्धविहार में जाना हर बौद्ध धर्मीय का आद्य कर्तव्य है - सारनाथ - Page 509

490 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आग्रह था कि दिसंबर में मैं जौनपुर जाऊं। मैंने उन्हें जाने का आश्वासन दिया। लेकिन तारीख अभी तय नहीं हुई है। जौनपुर में विराट सामुदायिक धर्मांतरण कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पूर्णिया जिले के लाखों पिछड़े लोग दीक्षा लेंगे। आज भी इन पिछड़ी जातियों (ओवीसी) और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का सवर्ण हिंदुओं द्वारा शोषण जारी है। बौद्ध धम्म की दीक्षा लेकर वे फिर अपने पूर्वजों के मार्ग पर चले जाएंगे।

बौद्ध धम्म की शुरुआत पक्की बुनियाद पर हुई है। यह मानव-धर्म है। इस धम्म के अलावा मानव के कल्याण का कोई दूसरा उपयुक्त धर्म नहीं है।

हमें भारत का प्राचीन इतिहास जानना होगा। भारत में सबसे पहले आर्य और नाग लोगों में युद्ध छिड़ा। आर्यों के पास युद्ध में घोड़े थे। उनके बल पर उन्होंने नाग लोगों को हराया। वही नाग आज हिंदू हैं। नागों ने सबसे पहले बौद्ध धर्म का स्वीकार किया। उन्हें बौद्ध धर्म के प्रसार में सफलता मिली। लेकिन इन नागों काखात्मा करने के लिए आर्यों ने समय-समय पर कोशिशें कीं। इसके सबूत महाभारत में कई बार मिलते हैं। आगे चल कर आर्यों ने ब्राह्मण धर्म को व्यापक बनाया। उसमें कई दोष निर्माण हुए। चतुरवर्ण व्यवस्था का उदय ब्राह्मणों ने ही किया। भगवान बुद्ध ने चतुरवर्ण का घोर विरोध किया। उन्होंने चतुरवर्ण को नष्ट कर समता का प्रचार किया। इसी आधार पर बौद्ध धर्म की स्थापना की। भगवान बुद्ध ने ब्राह्मणों के यज्ञों को अमान्य कर उन्हें बंद करवाया। ब्राह्मणों ने हिंसा की प्रथा की शुरुआत की थी। उसे नष्ट कर भगवान ने अहिंसा का प्रसार किया।

भगवान ने कहा है कि बौद्ध धर्म महासागर की तरह है। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। भगवान बुद्ध ने करुणा का प्रसार कर उस युग के बहुजन लोगों के मन आकर्षित किए और उन्हें सही मार्ग दिखाया।

हिंदू धर्म की जड़ों में ही रोग हुआ है। इसी कारण हमें अलग धर्म ग्रहण करना होगा। मेरी राय में बौद्ध धर्म ही योग्य धर्म है। इसमें उच्च-नीच, अमीर-गरीब, जाति-पांति आदि भेदभाव नहीं हैं।

अस्पृश्य वर्ग का कल्याण बौद्ध धर्म स्वीकारने से ही होने की संभावना है। हिंदू समाज में व्याप्त असमानता, भेदाभेद, अन्याय और कुप्रथा बौद्ध धर्म के स्वीकार से दूर हो सकते हैं।

भारत के अस्पृश्यों द्वारा बौद्ध धर्म स्वीकारे जाने पर बर्मा, चीन, जापान, लंका थाइलैंड, मलेशिया आदि सभी बौद्ध देशों को हमारी करुण स्थिति पर सहानुभूति होगी। और हम हमेशा के लिए हिंदू धर्म के अत्याचारों से मुक्त हो जाएंगे। ऊपर बताए देशों ने