32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सर्वेसर्वा एम. एम. ससालेकर लोगों को किनारे करते हुए डॉ. बाबासाहेब के लिए भीड़ में से रास्ता बना रहे थे।
कुछ दूर चलने के बाद बाबासाहेब के स्वागत के लिए अपने छोटे-छोटे बच्चों को साथ लिए बैठी करीब 15000 महिलाओं ने डॉ. बाबासाहेब पर फूल बरसाए। ये महिलाएं बारिश, धूप, तेज हवाएं इतना ही नहीं खुद अपनी तथा अपने बालको की भूख की परवाह किए बगैर डॉ. बाबासाहेब के स्वागत के लिए आई थीं। उनके स्नेह के कारण सबके हृदय गद्गद हुए। दुनिया के किसी भी भगवान के प्रति उसके भक्तों में नहीं होगी ऐसी भक्ति और स्नेह डॉ. बाबासाहेब के चरणों में होने का सबूत अस्पृश्यों ने दुनिया को दिया।
डॉ. बाबासाहेब को उसी रास्ते से और आगे ले जाकर उसी समय वहां बनाए गए ऊंचे मंच पर बिठाया गया।
कई फूलमालाएं उनके गले में पड़ी थीं तथा लोगों के बीच जैसे खुशी की लहरें उमड़ रही थीं। लोग कई प्रकार के नारे लगा रहे थे। उनमें प्रमुख थे अम्बेडकर कौन है, दलितों का राजा है_ अम्बेडकर जिंदाबाद, थोड़े दिन में भीम राज_ शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की जय हो_ स्वतंत्र मताधिकार हासिल करो आदि। बुलंद नारों के कारण स्टेशन परिसर गूंज रहा था।
यह गूंज स्टेशन के बाहर वाले रास्ते तक पहुंची तो वहां इकठ्ठा हुए हजारों लोगों में हलचल हुई। बाढ़ के पानी की तरह लोगों का हुजूम सेंट्रल स्टेशन में घुसा तो स्टेशन तथा उसके आसापास का खुला हिस्सा पूरी तरह भर गया। स्टेशन के छज्जे, पुल के जंगले आदि पर लोगों की पहले से ही भीड़ थी। वाहनों की आवाजाही ठप्प थी वाहन जहां थे वहीं खड़े हो गए।
लोगों को संबोधित करने के लिए डॉ. बाबासाहेब खड़े हो गए। आसपास तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। डॉ. बाबासाहेब के चेहरे पर यात्रा की थकान और परेशानी की जगह प्रसन्नता थी। चेहरे के इर्द-गिर्द प्रसन्नता की आभा फैली हुई थी।
पहले उन्होंने मुंबई की दलित जनता की ओर से किए गए अभूतपूर्व स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। फिर वह बोले-
दिल्ली से मैं हार कर नहीं लौटा हूं। परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए छात्र की सांत्वना की तरह यह सभा मेरी सांत्वना के लिए आयोजित नहीं की गई है। अपनी पूरी जिंदगी में मुझे कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा। पिछले चार सालों से, मैं अपने दलित समाज के लिए जो कुछ कर रहा हूं, उसके लिए यहां मेरा इस प्रकार स्वागत किया जा रहा है। यह बात मेरे दुश्मन और घर के भेदी जरूर याद रखें। (तालियों की गड़गड़ाहट)। वाइसराय द्वारा हाल ही में घोषित की गई नई अस्थाई सरकार के मंत्रीमंडल में अस्पृश्य