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वर्ग के प्रतिनिधि को शामिल किया गया यह वास्तव में हमारी जीत है। 1945 में हुई शिमला परिषद में भारत सरकार में एक भी अस्पृश्य प्रतिनिधि को शामिल करने से गांधी ने इनकार किया था। अब जिन जगजीवन राम को वाइसराय ने चुना है उन्हें ही गांधी ने उस वक्त साफ-साफ कह दिया था कि केंद्र सरकार में अस्पृश्यों के प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन अब एक साल के बाद अस्पृश्यों का अधिकार मान लिया गया है। यह हमारे आंदोलन का ही फल है। संगठित आंदोलन के जरिए ही हमने यह हासिल किया है।
केंद्र सरकार में अस्पृश्य वर्ग को स्थान मिला यही महत्वपूर्ण बात है। व्यक्ति भले कोई भी हो। उस जगह अगर हमारा कुत्ता भी जाकर बैठे तो कोई बात नहीं। (हंसी की गड़गड़ाहट और तालियां) वाइसराय का चुना आदमी लायक निकले तो और अच्छा है। समय के साथ उसकी काबिलियत अपने आप साफ होगी, लेकिन एक बार फिर मैं साफ-साफ कहता हूं कि अस्पृश्य वर्ग को सत्ता में हिस्सा लेने का मौका मिला यह हमारे आंदोलन का ही फल है। हमारी मांगें लेकिन इतने भर से पूरी नहीं होतीं। हमारी न्याय मांगें पूरी हुए बगैर हमारा आंदोलन समाप्त नहीं होगा। मुसलमानों की संख्या की तुलना में हमारी आबादी आधी होने के कारण उसी अनुपात में हमें सरकार में जगहें मिलनी चाहिएं।
1942 के आंदोलन में गांधी ने नारा दिया था- करेंगे या मरेंगे । हमारी लड़ाई की भी यही घोषणा होगी। उद्देश्य की प्राप्ति तक हम जान की बाजी लगा कर लड़ेंगे। आज हम लड़ाई हारे होंगे, लेकिन युद्ध हम जीतेंगे ही। (तालियों की गड़गड़ाहट)
मुंबई हमारे आंदोलन का केंद्र है। इसीलिए चार सालों के बाद एक बार दोगुने उत्साह के साथ इस आंदोलन में आपका साथ देने के लिए मैं फिर आ गया हूं। सिर्फ मेरा कार्यक्षेत्र ही बदला है। अब आपसे मेरा पहले से अधिक ता८ुक होगा। अपने संगठन को अभेद्य बनाएं। आपसी मतभेदों को भूल जाइए। अबके बाद अपने दरवाजे हमेशा खुले रखें। निर्भय बनें और जोरदार लडाई की तैयारी रखें। अपने परिवार से आगे सोचिए और अपने समाज के लिए थोड़ा स्वार्थ त्याग करें। आखिकार सफलता आपको ही प्राप्त होनी है। इस जोशीले संदेश के साथ डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपना तेजस्वी भाषण पूरा किया तब जमीन-आसमान तालियों की और जय भीम के नारों से गूंज रहा था।
आखिर श्री मडकेबुवा ने सभी कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और लोगों के प्रति आभार प्रकट किया। लोग आनंद भरे हृदय से, अति प्रन्नित मन के साथ अपने-अपने घर लौटे। इस प्रकार यह विराट स्वागत सभा अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुई।