350 25-11-1956 बौद्ध धर्म हिंदु धर्म की शाखा है यह कहना एक शरारत और छल-कपट है - काशी - Page 512

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बौद्ध धर्म हिंदु धर्म की शाखा है यह भ्रामक प्रचार है कहना एक

शरारत और छलकपट है

दिनांक 25 नवंबर, 1956 के दिन सुबह 10 बजे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने काशी विश्वविद्यालय की विद्यार्थी परिषद का उद्घाटन किया। ख्1,

डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर ने कहा-

आज हिंदू माने जाने वाले कई लोग नागवंशीय हैं। जो नाग लोग आर्यों से पहले भारत में रहते थे वे आर्यों से अधिक सुसंस्कृत थे। उन पर आर्यों ने विजय पाई। लेकिन इससे आर्यों की संस्कृति नागों की संस्कृति से श्रेष्ठ साबित नहीं होती। आर्यों की जीत का कारण था उनका वाहन। आर्य घोड़ों पर सवार होकर लड़ते थे और नाग पैदल लड़ते थे। आर्य-नागों के बीच की लड़ाई जान की बाजी लगा कर लड़ी गई। महाभारत काखांडववन और सर्पसत्र की कहानियों से कल्पना का आवरण अगर दूर किया जाए तो आर्य-नाग युद्ध का भयानक स्वरूप नजर आता है। आर्यों नेखांडव वन दहन की तरह यानी scorched earth policy का इस्तेमाल कर नागों की बुरी हालत कर दी। इस विध्वंस से अगस्ती ने एक नाग की रक्षा की ऐसी कहानी बताई जाती है। कहानी में भले अत्युक्ति हो लेकिन नागों की बस्तियां पूरी तरह नष्ट करने के लिए आर्य किस प्रकार लड़ाई कर रहे थे इसकी जानकारी यहां मिलती है। पराजय के कारण नागों के मन में आर्यों के बारे में द्वेष था। परीक्षित की जान लेने वाला तक्षक कोई सर्प नहीं बल्कि एक नागवंशीय नेता था। आर्यों के मन में नागों के बारे में जो द्वेष भावना थी उसका उदाहरण देते हुए कर्ण और अनंत के कर्णार्जुन युद्ध से पूर्व हुए संभाषण का जिक्र किया जा सकता है। कर्ण-अर्जुन युद्ध से पहले अनंत नाम का नागवंशीय योद्धा कर्ण से मिला और उसने कहा कि मैं अर्जुन के खिलाफ सहायता करने का आश्वासन देता हूं। कर्ण ने उसकी सहायता लेने से इनकार किया। क्योंकि, कर्ण आर्य था और अनंत नाग था। आपसी लड़ाई में आर्यों द्वारा नागों की मदद लेना निषिद्ध था। ब्राह्मण और क्षत्रियों के बीच का संघर्ष बौद्धपूर्व समय का दूसरा संघर्ष था। इस लड़ाई के वर्णन आगे पुराणों में आए हैं। उसी प्रकार मनु द्वारा स्मृतियों में क्षत्रियों द्वारा ब्राह्मणों को आदरयुक्त बर्ताव क्यों करना चाहिए इस विषय पर कारण देते हुए पूर्वकालीन ब्राह्मण-क्षत्रियों की लड़ाई का उदाहरण दिया है।

  1. धर्मदूतः मासिक, दिसंबर, 1956, पृ. 245