34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
240
इस देश का कोई भी राजनीतिक दल हमारी आजादी की लड़ाई
का समर्थन नहीं करता.....
पूना शहर के अहिल्याश्रम में 21 जुलाई, 1946 के दिन दोपहर 3.30 बजे एक सभा का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर महिलाओं तथा पुरुषों की भारी-भरकम भीड़ को संबोधित करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा -
भाइयों और बहनों,
यहां चल रहे सत्याग्रह का सिंहावलोकन करने के लिए आज हम सब लोग यहां इकठ्ठा हुए हैं। अपने सत्याग्रह का खबरें भले थोड़ी-थोड़ी ही क्यों न हो, अखबारों में छापी गई हैं। लेकिन आपने देखा होगा कि अखबारवालों ने जो कुछ छापा है उसमें सत्याग्रह के बारे में थोडी-सी भी सहानुभूति या आदर की भावना नहीं दिखाई गई है। उन्होंने लिखा है कि इस सत्याग्रह में केवल महार लोग ही शामिल हैं क्योंकि मैं केवल महारों का ही नेता हूं। उन्होंने प्रचार किया है कि मेरे साथ अन्य कोई भी नहीं है। इस तरह का प्रचार आज-कल की बात नहीं है। वे हमेशा ही ऐसा करते आए हैं। पता चला कि विदेशों में भी उसका थोड़ा असर हुआ है। कल कमीशन की ओर से पार्लियामेंट में एक भाषण हुआ था। उसमें कहा गया है कि मैं पूरे भारत का नेता नहीं हूं। मेरे पीछे मध्य प्रांत और मुंबई के कुछ लोग हैं, बस। उनका यह कथन असत्य, चालाकी भरा और घातक है। हाल ही में हुए बंगाल के चुनावों से उनके कथन का झूठ साफ हो जाता है।
भारत के पूरे अस्पृश्य समाज का समर्थन मुझे प्राप्त है। बंगाल का चुनाव इसका सबूत होगा, क्योंकि बंगाल में कोई महार नहीं है। बंगाल में नामशूद्र नामक जाति है, इन नामशूद्रों ने मुझे चुनाव में जिताया है। अब मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि, आपके
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकरांची भाषणेः संपा. मा. फ. गाजरे, खण्ड 1. 1986 में पुनर्मुद्रित. पृष्ठ 162-166