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और वह समता का स्वीकार करेगा। हिंदू धर्म में सुधार आएगा यह एक भ्रम है। इतिहास गवाह है कि ढ़ाई हजार वर्ष पूर्व बुद्ध ने समता का उपदेश भारत को दिया था। लेकिन इस देश ने उस उपदेश को ही दबा देने की नीचता भरा काम जानबूझ कर किया और उसके ठीक विरुद्ध विषमता आधारित और कुछखास वर्गों के हित के लिए ही हिंदू धर्म प्रभावशाली बनाया गया। जब तक हिंदू धर्म का पालन किया जाता है तब तक इस देश से सामाजिक विषमता हटेगी नहीं। हिंदू धर्म द्वारा बौद्धिक स्तर पर भले जितने भी उदात्त सिद्धान्तों की घोषणा की जाए उनका आचार वर्ण, जात-पांत, स्पृश्यास्पृश्यता जैसी विषमता भरा ही होता है। चतुरवर्ण उसकी रीढ़ है। इसलिए हिंदू धर्म का त्याग करने के अलावा आपके सामने और कोई रास्ता नहीं है। आप बौद्ध होंगे तो बंधु मानने वाले कुछ लोग इस दुनिया में आपको मिलेंगे। आज हमारे देश में जो अन्याय हो रहा है उसके कारण हम बिलबिला रहे हैं। लेकिन हमें कहीं से सहानुभूति भरा साथ नहीं मिल रहा। क्योंकि, अन्याय करने वाले सभी हिंदू हैं और उन्हीं के कहे अनुसार यहां का राजतंत्र काम करता है। आप बौद्ध बनेंगे तो विदेशी बौद्ध आपको अपना बंधु मानेंगे। आपकी आवाज का वे जवाब दिए बगैर रहेंगे नहीं। ख्2,
- प्रबुद्ध भारतः 31 अगस्त, 1957