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पर हमें निर्भर रहना पड़ेगा। जब तक हमारे पास अच्छे परिणामों के बारे में बुद्धिवादी निर्णय की कसौटियां नहीं होंगी तब तक किन निर्णयों को लागू करना चाहिए हम यह तय नहीं कर पाएंगे। सवाल यह है कि, न्यायपूर्ण और संगठित समाज बनाने के उद्देश्य की प्राप्ति की राह में जातिप्रथा समाज व्यवस्था का अनुल्लंघनीय रोड़ा दूर किए बगैर क्या भारतीय समाज इस उद्देश्य को प्राप्त कर सकेगा? जाति में विभाजित समाज रचना के अस्तित्व में होते हुए एक जैसा समाज निर्माण होना क्या संभव है या निर्माण किया जा सकता है? गलत मूल्यांकन और गलत वास्तव दर्शन के कारण सभी भारतियों के मन अनिश्चित हुए हैं। उन्हें गलत राह पर डाल दिया गया है। असंगठित औरखंडित समाज विविध ढंग के प्रारूप और परिमाण निश्चित करता रहता है। ऐसे हालात में जाति के सवाल के कारण हर भारतीय के लिए मन में सिलसिला रखना असंभव-सा हो गया है।
शिक्षा से क्या जातियों का विनाश हो सकता है? इसका जवाब हां भी होगा और नहीं भी। आज जो शिक्षा दी जा रही है उसका जातियों पर कोई असर नहीं होने वाला। वह जिस हालत में हो उसी हालत में बनी रहेगी। ब्राह्मण जाति इसका ज्वलंत उदाहरण है। उसमें सत-प्रतिशत लोग पढ़े-लिखे हैं। नहीं, उसमें से बहुसंख्य लोग उच्चशिक्षा प्राप्त हैं। इसके बावजूद कोई ब्राह्मण अपनी जाति के खिलाफ नहीं दिखाई देता। वास्तविकता यह है कि उच्च जाति के शिक्षा प्राप्त व्यक्ति के लिए शिक्षा प्राप्त करने से पहले की तुलना में जातिव्यवस्था बनी रहनी चाहिए ऐसा अधिक तीव्रता से लगने लगाता है। क्योंकि शिक्षा ही उसे बड़े पद प्राप्त करने का अधिक मौका देती है इसलिए जातिव्यवस्था बनाए रखने की दिशा में वह काम करने लगता है। इस प्रकार देखें तो जाति व्यवस्था को नष्ट करने में शिक्षा उपयुक्त साधन साबित नहीं होती। यह शिक्षा का नकारात्मक पहलु हुआ। भारतीय समाज के निचले स्तर के लोगों को शिक्षा दी जाए तो यही शिक्षा जातिव्यवस्था को पिघला देगी। शिक्षा से उनमें विद्रोह की भावना जागेगी। वर्तमान स्थितियों में उनके अज्ञान के कारण वे जातिव्यवस्था के समर्थक बने हुए हैं। एक बार उनकी आंखेंखुल जाएं तो वे जातिव्यवस्था को नष्ट करने के लिए कटिबद्ध होंगे।
वर्तमान नीति का प्रमुख दोष यह है कि बड़े पैमाने पर शिक्षा दी जाने के बावजूद भारतीय समाज में जिन्हें उसकी असली जरूरत है उन्हें शिक्षा नहीं मिल पाना। भारतीय समाज के जिन लोगों का स्वार्थ जाति व्यवस्था के कारण साध्य होता है उसी स्तर के लोगों को अगर आप शिक्षा मुहैय्या कराते रहेंगे तो जातिव्यवस्था और मजबूत होती रहेगी। ऐसा न करते हुए भारतीय समाज के निम्न स्तर के जो लोग जातिव्यवस्था को उखाड़ फेंकना चाहते हैं उन्हें अगर शिक्षा दी गई तो निश्चित तौर पर जातिव्यवस्था ध्वस्त होगी। हर बार किसी भी प्रकार से तारतम्य का पालन न करते हुए भारत सरकार और अमेरिकन फाउंडेशन की शिक्षा की मदद करने की नीति जातिव्यवस्था को और मजबूत कर रही