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कथनानुसार अगर मैं भारत के सभी अस्पृश्यों का नेता नहीं हूं तो मैंने बंगाल से चुनाव जीता कैसे?
अंग्रेजों ने कई बार घोषणा की कि अस्पृश्य समाज भारत की स्वतंत्र जमात है। लेकिन कैबिनेट मिशन द्वारा अस्पृश्य समाज का कभी नाम नहीं लिया गया। उन्होंने अस्पृश्य समाज का नाम शामिल नहीं किया, उसी समय मैंने संविधान समिति में शामिल होने का निर्णय लिया।
अस्पृश्य समाज के कल्याण के लिए मेरा संविधान समिति में शामिल होना बेहद जरूरी था। संविधान समिति में, मैं न पहुंच पाऊं इसलिए काँग्रेस ने कई षडयंत्र रचे। महाराष्ट्र के बहुत कम लोग बड़े हैं उनमें मुझे शामिल न करने वालों को मूर्ख ही कहा जा सकता है। मि. जयकर को काँग्रेस ने खत भेजा कि संविधान समिति का चुनाव आप लडि़ए। मि. मुन्शी को बुलाया गया और कई अन्य लोगों को आमंत्रित किया गया। इतनी सुहागनों के बीच वास्तव में उन्हें मुझे भी कुंकुम लगाना चाहिए था, लेकिन उनकी कोशिश मुझे विधवा बनाने की ही रही। उन्होंने इसके लिए बहुत कोशिश की। इसीलिए सुख से रहने के लिए मैं मुंबई छोड़ कर बंगाल में चला गया। वहां मैंने महार जाति के लोग न होते हुए भी चुनाव जीता इस बात को मेरे दुश्मन हमेशा याद रखें।
इस सत्याग्रह में केवल महार लोग ही शामिल हैं ऐसा कहा जाता है जो कि सरासर झूठ है। पकड़े गए लोगों के नामों की फेहरिस्त अभी-अभी आप लोगों को पढ़ कर सुनाई गई। उससे आप जान जाएंगे कि इस सत्याग्रह में महार, मांग, चमार आदि सभी जातियों के लोग शामिल हैं। मुंबई प्रांत में अन्य जाति के लोगों की तुलना में महार जाति के लोगों की संख्या ज्यादा है। स्पष्ट है कि अस्पृश्य लोगों के उद्धार के आंदोलन में महार जाति के लोग बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं, इसलिए किसी को बुरा मानने की जरूरत नहीं है।
किसी न किसी लालच के वशीभूत होकर ज्यादातर लोग काँग्रेस में शामिल हुए हैं। कोई चमड़ेका व्यापार करना चाहता ह। इसलिए उसे चमड़ा पाना है, कोई मक्खन का व्यापार करना चाहता है इसलिए उसे सफेद रंग का पतला कागज चाहिए और इसीलिए वह काँग्रेस में शामिल हो रहा है। कोई काँट्रॅक्टस् पाना चाहता है तो कोई नौकरी पाना चाहता है। हमारे आंदोलन में कोई अपना स्वार्थ साधने के लिए शामिल नहीं हुआ। किसी को देने के लिए हमारे पास नौकरियां नहीं हैं, हम किसी को काँट्रॅक्टस् नहीं दे सकते और मक्खन के लिए हम किसी को सफेद पतला कागज भी नहीं दे सकते। (लोगों की हंसी और तालियों की आवाज)। हम सब बिल्कुल निस्वार्थ भाव से अपने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा ले रहे हैं। निस्वार्थ भाव से लोगों के शामिल होने में ही हमारे आंदोलन की सफलता निहित है।