38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
में किसानों-मजदूरों के हाथ होनी चाहिए।
अन्य लोग भले कुछ भी कहें, हमें आजादी चाहिए और वो हम लेकर रहेंगे। इस देश की किसी भी जाति, जमात अथवा वर्ग द्वारा हम पर शासन न चलाया जाए। हमें ऐसे राजनीतिक हक चाहिए कि उनके सहारे हमें इस देश में सिर ऊंचा उठा कर जीने की आजादी मिले। गुलामी को हम अपने जूते की नोक पर रखेंगे।
इस देश के 6 करोड़ अस्पृश्यों की लड़ाई सही मायने में आजादी की लड़ाई है। इसके बावजूद इस देश के किसी व्यक्ति का हमारे आंदोलन को समर्थन नहीं, सहयोग नहीं, सहानुभूति नहीं। पोस्ट की हड़ताल हो तो उसे सबका समर्थन मिलता है। मैं यह नहीं कह रहा कि आप उन्हें समर्थन न दें। इस देश में कम्युनिस्टस् हैं, उग्र मतवादी हैं और भी मतांतरवादी हैं लेकिन इनमें से किसी का भी हमारी आजादी की लड़ाई के लिए समर्थन नहीं।
आप सभी लोगों को एक बात ध्यान में रखनी होगी कि हमें किसी का समर्थन मिले या न मिले हमें यह लड़ाई जीतनी है। अपने ही बलबूते हमें लडाई जीतनी है। हमें अपनी ताकत पर भरोसा करना है। उसी पर अपना दारोमदार रखना है। अपने मजबूत संगठन के सहारे हम सभी दिक्कतो को लांघ सकते हैं। इस सत्याग्रह की सारी जिम्मेदारी केवल हम पर है। अब लड़ाई की शुरुआत हो चुकी है। सिर फूटे या माथा, हमें आखिर तक लड़ने का निश्चय करना होगा।
महिलाओं के बारे मे, मैं दो शब्द कहना चाहूंगा। महिलाओं का इस सत्याग्रह में सहयोग बडे ही गर्व की बात है। काँग्रेस के आंदोलन में महिलाओं के सहयोग के कारण उन्हें बड़ा गर्व महसूस होता था। लेकिन आज के हालात से पता चलेगा कि अस्पृश्य समाज की महिलाएं भी अन्य महिलाओं की तुलना में किसी भी तरह पीछे नहीं हैं। हमारे आंदोलन को आज महिलाओं से भी बहुत बड़े पैमाने पर समर्थन मिल रहा है। हालात अगर अनुकूल होते तो इससे अधिक महिलाएं कारागृह जातीं।
रोक लगा रखी जिसकी वजह से हमारे सामने कई मुश्किलें हैं। इसी कारण सत्याग्रह के मोर्चे पर हम ज्यादा लोगों को ला नहीं सकते। काँग्रेस सरकार रोक को खत्म करे। अगर वे रोक खत्म करते हैं तो मेरी काँग्रेस को चुनौती है कि बड़ी आसानी से कम से कम एक लाख लोग कारागृह जा सकते हैं।
मैंने देश को नुकसान पहुंचाने वाली कौन-सी बात की है इसका मुझे पता नहीं। राउंड टेबल कॉन्फरंस से लेकर मेरी सरकारी नौकरी तक सारे कामों पर काँग्रेस वाले पैनी नजर डालें। अंग्रेजों को डपटकर बताने वाले मंत्रियों में मैं प्रमुख था और आज अंग्रेजों को देख कर भी जिन्हें डर लगता है वे मंत्री भी सदन में जाकर बैठे हैं। काँग्रेस