242 17-12-1946 समय और परिस्थितियों को अनुकूल बनाया जाए तो दुनिया की कोई भी शक्ति इस देश को एक होने से रोक नहीं सकती - नई दिल्ली - Page 59

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के प्रतिनिधि के तौर पर चुना। काँग्रेस द्वारा अनुसूचितों पर किए गए अत्याचारों के बावजूद वे सरकार में शामिल होने के लिए तैयार हैं इससे उनकी असली योग्यता का पता चलता है।

अनुसूचितों द्वारा छेड़े गए सत्याग्रह आंदोलन के बारे में पूछे जाने पर डॉ. अम्बेडकर ने कहा, उचित अधिकार पाने के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हम कभी शरण नहीं लेंगे।

इस अवसर पर शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के अध्यक्ष दिवाणबहादुर एन. शिवराज का भी भाषण हुआ।

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समय और स्थितियों को अनुकूल बनाया जाए तो दुनिया की कोई

भी शक्ति इस देश को एक होने से रोक नहीं सकती

संसद के कामकाज की शुरुआत 9 दिसंबर, 1946 से हुई थी। संसद में कुल 296 सदस्य चुन कर आए थे। उनमें से 207 सदस्यों ने कामकाज में हिस्सा लिया। 89 सदस्य अनुपस्थित थे। उन्होंने संसद के कामकाज का बहिष्कार किया था कहना ज्यादा सही होगा। इनमें ज्यादातर सदस्य मुस्लिम लीग और रियासतों के प्रतिनिधि थे।

दिनांक 13 दिसंबर, 1946 के दिन पं. जवाहरलाल नेहरू ने संविधान का योग्य और लक्ष्य बताने वाला प्रस्ताव रखा। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि हर बार की तरह केवल हाथ ऊपर उठा कर नहीं वरन् सदस्य खड़े होकर इस प्रस्ताव को पारित करेंगे ऐसी मैं उम्मीद करता हूं। श्री पुरुषोत्तमदास टंडन ने प्रस्ताव को समर्थन देने वाला वक्तव्य दिया।

डॉ. एम. आर. जयकर ने श्री नेहरू के प्रस्ताव में सुधार का प्रस्ताव रखा। उनके मतानुसार भारत को एक आजाद, प्रजातांत्रिक, सार्वभौम राज्य बनाने के दृष्टिकोण से, संविधान को इसके अनुकूल बनाने के लिए मुस्लिम लीग और भारतीय रियासत के प्रतिनिधियों के सहयोग की जरूरत है। इससे इस प्रस्ताव को अलग बल मिलेगा। इसके लिए इन दो संगठनों के प्रतिनिधि अगर शामिल होना चाहते हैं तो उनके शामिल होने तक प्रस्ताव पर चर्चा को आगे बढ़ाया जाए।

कुछ अपवादों को अगर छोड़ दें तो कई सदस्यों ने श्री जयकर के सुझाए गए सुधार का कड़ा विरोध किया। वे किसी हालत में चर्चा को स्थगित होने नहीं देना चाहते थे।

इस पृष्ठभूमि पर संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्रप्रसाद ने अगले वक्ता के तौर पर डॉ. बाबासाहेब को आमंत्रित किया। वह मंगलवार का दिन और तारीख थी 17 दिसंबर,

  1. Dr. Babasaheb Ambedkar Writings and speeches Vol. 13 PP 7 )

  2. अतिथि संपादक मंडल और हिंदी अनुवाद संध्या पेडणेकर द्वारा किया गया है।